
सीधी। संजय टाइगर रिजर्व में गुरुवार को वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को एक रोमांचक अनुभव मिला। रिजर्व के मंडोला बीट में एक साल बाद प्रसिद्ध मेल टाइगर टी-67 ‘त्रिशूल’ का दीदार हुआ। यह बाघ अपने शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है और आमतौर पर पर्यटकों की नजरों से दूर रहता है। गुरुवार सुबह सफारी के दौरान जब पर्यटक वाहन मंडोला बीट की ओर बढ़ रहा था, तो जंगल में पक्षियों की तेज चहचहाहट सुनाई दी। कुछ ही मिनटों बाद टी-67 त्रिशूल सामने से आराम से चलता हुआ दिखाई दिया। बाघ को देखते ही सफारी वाहन रोक दिया गया। पर्यटकों ने लगभग आठ मिनट तक उसे करीब से देखा, जिसके बाद वह धीरे-धीरे घने जंगल की ओर चला गया।
पर्यटकों को आसानी से दिखाई दे रहा था त्रिशूल-
पर्यटक राम सुमिरन पटेल ने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पक्षियों की गतिविधियों से वन्यजीव की मौजूदगी का आभास हो गया था। उन्होंने कहा, करीब पांच मिनट आगे बढ़ने पर त्रिशूल आसानी से दिखाई दे गया। वह पूरी तरह शांत था और लगभग आठ मिनट तक सामने रहने के बाद जंगल में ओझल हो गया। यह मेरे जीवन के सबसे यादगार वन्यजीव पलों में से एक रहा।
करीब एक साल बाद दिखा मेल टाइगर-
टी-67 त्रिशूल संजय टाइगर रिजर्व का एक महत्वपूर्ण मेल टाइगर माना जाता है। वन अधिकारियों के अनुसार
इस बाघ ने क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, लगभग एक वर्ष पहले इस मेल टाइगर ने कुछ शावकों को मारने की घटना भी चर्चा में रही थी। इस घटना के बाद से यह लंबे समय तक दिखाई नहीं दिया था, जिससे इसका दोबारा नजर आना वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष माना जा रहा है।
