ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे: ग्वालियर चंबल अंचल के व्यापारियों एवं उद्योगपतियों के सवासौ साल पुराने संगठन मप्र चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज की सियासत अब तक व्हाइट और क्रिएटिव हाउसों के बीच विभाजित थी लेकिन चेंबर के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब हाउसों की हदबंदी टूटकर इनकी जगह समग्र व्यापारी समाज नजर आ रहा है। इसका अहसास कराया है मौजूदा अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने, जो व्हाइट हाउस से निकल कर आए हैं और निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। क्रिएटिव हाउस अप्रत्यक्ष तौर पर उनके साथ खड़ा नजर आ रहा है।
दरअसल, क्रिएटिव ने बाकी पांच पदों के लिए तो प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं लेकिन अध्यक्ष पद को खाली छोड़ दिया है। इस हाउस के मुखिया राधेश्याम भाकर कह चुके हैं कि यदि कोई निर्दलीय या अन्य सुयोग्य प्रत्याशी मैदान में आया तो उसे भी समर्थन दे सकते हैं। क्रिएटिव की मीटिंग के दूसरे रोज ही प्रवीण ने अपनी निर्दलीय उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया तो क्या क्रिएटिव का रुख प्रवीण की तरफ है? यह चुनाव ‘सिंधिया वर्सेज नरेंद्र सिंह’ की भी शक्ल लेता दिख रहा है। प्रवीण जहां सिंधिया के नजदीकी हैं वहीं व्हाइट हाउस के प्रत्याशी पारस जैन नरेन्द्र सिंह से जुड़े हैं। लिहाजा ग्वालियर भाजपा के दोनों खेमे भी चुनाव में जोर लगाएंगे।
ओटीएफ मैराथन के जरिए कांग्रेस की नजर युवा वोट बैंक पर
युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह ने आज बुधवार को ग्वालियर में कांग्रेस के आधा दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं को जोड़कर फिर अपनी ताकत दिखाई। बीती शाम उन्होंने नीट परीक्षा में धांधली के मुद्दे पर बड़ा मशाल जुलूस निकाला था तो आज सरकारी भर्ती परीक्षाओं में वन टाइम फीस व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर शहर की सड़कों पर मैराथन दौड़ आयोजित कर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों के प्रति अपनी पार्टी की गंभीरता जाहिर करने की कोशिश की। खास बात यह कि इन आयोजनों में कांग्रेस के प्रदेश मुखिया जीतू पटवारी, युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु और जयवर्धन, पीसी शर्मा, सचिन यादव और प्रियव्रत जैसे कई पूर्व मंत्री और विधायक भी शामिल हुए।
मितेंद्र दर्शन अपने दिवंगत पिता की तरह पहले महल से जुड़े हुए थे लेकिन जब सिंधिया ने भगवा पहना तो इस युवा नेता ने उनके साथ जाने के बजाए कांग्रेस में रहना ज्यादा वाजिब समझा। कांग्रेस नेतृत्व ने भी उनकी वफादारी का मान रखकर उन्हें युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी। बहरहाल मितेंद्र की नजर मिशन 28 में ग्वालियर विधानसभा सीट से टिकट पर लगी है।
कोर्ट ने बंधाई अचलेश्वर न्यास के चुनाव की आस
एक ओर देश में इन दिनों अयोध्या के रामलला मंदिर की दानराशि में करोड़ों के हेरफेर का मामला गर्माया हुआ है, वहीं ग्वालियर चंबल की फ़िजां भी यहां के सबसे प्रतिष्ठित मंदिर अचलेश्वर के प्रबंधन को लेकर हाईकोर्ट द्वारा की गई तल्ख टिप्पणियों के चलते सरगर्म है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की है कि पब्लिक ट्रस्ट की संपत्ति समाज के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए होती है, न कि किसी के निजी मुनाफे के लिए। बहरहाल, खास बात यह है हाईकोर्ट के आदेश के बाद यहां अगले छह महीने के भीतर न्यास के चुनाव कराए जाने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
यहां न्यास के सदस्य आपस में ही झगड़ते रहे हैं, आरोप प्रत्यारोपों में न्यास इस कदर उलझा कि कलेक्टर को यहां रिसीवर बिठाना पड़ा। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और अदालत को न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा करने की उनकी कानूनी जिम्मेदारी भी याद दिला दी है। इस प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण पर करीब 3 करोड़ से अधिक की लागत आई है लेकिन अभी तक यहां न्यास के चुनाव का कोई सिला नहीं बन पा रहा था। मंदिर से जुड़े लाखों भक्त चाहते हैं कि यहां रिसीवर के बजाए व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के ही हाथों में हों, और यह तभी संभव है जब यहां पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से चुनाव प्रक्रिया निपटाई जाए। यह संतोषप्रद बात है कि हाईकोर्ट ने यहां के आम श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप ही निर्णय दिया है।
वीरांगना मेला से ग्वालियर को मिली पहचान
देश की आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए शहीद हुईं वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर भाजपा के हिंदुत्ववादी नेता जयभान सिंह पवैया पिछले 27 बरस से उनके समाधिस्थल पर वीरांगना बलिदान मेला लगाते आ रहे हैं। इस बार भी लगाया है। कह सकते हैं कि वीरांगना मेला के जरिए ग्वालियर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है और इसी के बाद स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई के योगदान पर देश के बड़े इतिहासकारों ने पुनर्लेखन किया है। पवैया चाहे सत्ता की वीथिकाओं में रहें या प्रतिपक्ष में, वीरांगना मेला की शान और रौनक में कोई कमी नहीं आई। भले ही सरकार से मदद न मिले, वे अपने दम पर भी मेला के लिए संसाधन जुटा लेते हैं। दिग्विजय और कमलनाथ के दौर में शहरवासी यह बखूबी देख भी चुके हैं।
