चंडीगढ़ | पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय (फरवरी 2027) से पहले आयोजित किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन राज्यों में चुनाव नवंबर 2026 में ही संपन्न कराए जा सकते हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण जनवरी 2027 में होने वाला हरिद्वार कुंभ मेला और फरवरी से प्रस्तावित जनगणना का दूसरा चरण है, जिसके चलते चुनाव आयोग चुनावी कैलेंडर में बड़ा फेरबदल कर सकता है।
प्रशासनिक और धार्मिक आयोजनों का प्रभाव
चुनावों को जल्दी कराने के निर्णय के पीछे प्रशासनिक व्यस्तता एक बड़ी वजह है। कुंभ मेले के दौरान भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक अमले की भागीदारी आवश्यक होती है, जिसके साथ चुनावी प्रक्रिया का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत भी चुनावी तैयारियों में बाधा बन सकती है। इसलिए, चुनाव आयोग मतदान को इन बड़े आयोजनों से पहले ही पूरा करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
सियासी दलों की बढ़ी हलचल
संभावित जल्दी चुनावों को देखते हुए पंजाब और उत्तराखंड में राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने चुनावी अभियान शुरू कर दिया है, वहीं कांग्रेस ने भी विशेष समितियों का गठन कर सांगठनिक बदलाव शुरू किए हैं। भाजपा भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। उत्तर भारत के इन राज्यों में अब राजनीतिक सक्रियता अपने चरम पर है, जिससे आने वाले महीने सियासी रूप से बेहद निर्णायक होंगे।

