मुंबई | आशुतोष गोवारिकर और आमिर खान की कालजयी फिल्म ‘लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया’ ने अपनी रिलीज के 25 शानदार वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 1893 के बैकड्रॉप पर आधारित यह फिल्म ब्रिटिश शासन के दमनकारी करों के खिलाफ एक गांव के संघर्ष और क्रिकेट के माध्यम से मिली जीत की कहानी है। एआर रहमान का जादुई संगीत और भुवन के जुझारू किरदार ने न केवल भारतीय सिनेमा में एक नई लहर पैदा की, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिलाई।
फिल्म निर्माण का चुनौतीपूर्ण सफर
‘लगान’ आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म थी, जिसके निर्माण के दौरान उन्होंने कई आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना किया था। आमिर खान ने याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने पिता के अनुभवों के कारण कभी फिल्म प्रोड्यूस न करने की कसम खाई थी, लेकिन आशुतोष गोवारिकर की पटकथा ने उनका मन बदल दिया। फिल्म के कलाकारों ने भी अपने किरदारों को जीवंत बनाने के लिए महीनों मेहनत की थी, चाहे वह बाघा का मूक अभिनय हो या ‘गोली’ की अनोखी गेंदबाजी शैली।
ऐतिहासिक उपलब्धियां और यादें
इस फिल्म ने न केवल आठ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते, बल्कि ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए नॉमिनेशन प्राप्त कर भारतीय सिनेमा को गौरवान्वित किया। फिल्म की पहली पब्लिक स्क्रीनिंग कच्छ में रखकर आमिर खान ने वहां के ग्रामीणों से किया अपना वादा पूरा किया था। आज ढाई दशक बाद भी ‘लगान’ का प्रभाव और उसकी मेकिंग की कहानियां दर्शकों को प्रेरित करती हैं, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक बनाती हैं।

