
जबलपुर। रांझी के नायब तहसीलदार भीमसेन पटैल पर जमीन बंटवारे के मामले में अनियमितता, धन की मांग और बिल्डर से मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए मूलनिवासी जनजागृति संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के अनुसार कटियाघाट निवासी स्व. अच्छेलाल झारिया ने अपनी मेहनत से अर्जित लगभग 3 एकड़ 65 डिस्मिल भूमि अपने दोनों पुत्रों छिदामी लाल और संतोष झारिया के नाम ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत स्टाम्प पर लिखित वसीयत के माध्यम से कर दी थी। कुछ वर्षों बाद उनके निधन पर छिदामी लाल झारिया ने वसीयत के आधार पर नामांतरण का आवेदन रांझी तहसील में प्रस्तुत किया। संघ का आरोप है कि इसी दौरान बिल्डर अमित अग्रवाल ने झारिया परिवार की बहनों से संपर्क कर उन्हें जमीन के बराबर हिस्से का लालच दिया और बाद में उनके हिस्से की जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी कर लिया। इसके चलते वसीयत आधारित बंटवारे पर विवाद खड़ा हो गया। संघ ने दावा किया कि नायब तहसीलदार ने आवेदक को बुलाकर धन की मांग की और कथित रूप से धमकी दी कि यदि पैसा नहीं दिया गया तो वसीयत को शून्य घोषित कर चारों भाई–बहनों के नाम बराबर हिस्सेदारी कर दी जाएगी। संघ का कहना है कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन को बिल्डर कम कीमत पर हथियाना चाहता है, जिसमें राजस्व अधिकारी के सहयोग का संदेह गहरा रहा है। मूलनिवासी जनजागृति संघ ने पूरी घटना की उच्चस्तरीय और सूक्ष्म जांच कराए जाने, तथा जांच पूर्ण होने तक नायब तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि वसीयत के अनुसार बंटवारा नहीं किया गया तो संगठन रांझी तहसील का घेराव कर आंदोलन करेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
