इंदौर: इंदौर अब केवल देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में ही नहीं, बल्कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है. यह कहानी किसी नए बांध या नदी की नहीं, बल्कि उस पानी की है जिसे कभी बेकार समझकर नालों में बहा दिया जाता था.शहर के कबिटखेड़ी सहित विभिन्न एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी पहुंचता है, जो आधुनिक उपचार प्रक्रिया से गुजरकर दोबारा उपयोग योग्य बन जाता है.
इंदौर का 450 एमएलडी के लगभग क्षमता वाला संयंत्र एसबीआर आधारित प्रमुख सीवेज उपचार संयंत्रों में शामिल है. लेकिन इसकी असली सफलता मशीनों में नहीं, बल्कि सोच में छिपी है. जहां देश के अनेक शहर हर साल नए जल स्रोतों की तलाश में जुटे रहते हैं, वहीं इंदौर धीरे-धीरे ‘पानी पैदा करने वाला शहर’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. नगर निगम निर्माण कार्यों, उद्यानों, हरित पट्टियों और अन्य गैर-पेयजल उपयोगों में उपचारित जल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है, ताकि नर्मदा पर निर्भरता कम हो सके.
163 गार्डन ट्रीटेड वाटर नेटवर्क से जुड़े
नगर निगम के अपर आयुक्त आशीष पाठक के अनुसार, शहर के 163 गार्डन ट्रीटेड वाटर नेटवर्क से जुड़े हैं. वर्तमान में 95 किलोमीटर लंबी अलग पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जो सिरपुर क्षेत्र की 7 किलोमीटर लाइन जुड़ने के बाद 102 किलोमीटर तक पहुंच जाएगी. वितरण के लिए 2 टंकियां, 5 सम्प और 43 हाइड्रेंट विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से उद्यानों, रोटरी और डिवाइडरों पर लगे पौधों एवं पेड़ों को नियमित पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. इंदौर में प्रतिदिन लगभग 400 एमएलडी के लगभग जलापूर्ति होती है, जिसमें से करीब 350 एमएलडी के लगभग पानी उपचारित होकर पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हो रहा है. यह उपलब्धि जल संरक्षण की दिशा में शहर की बड़ी छलांग मानी जा रही है. जिन क्षेत्रों तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है, वहां लगभग 35 टैंकरों के माध्यम से ट्रीटेड वाटर पहुंचाया जा रहा है. इनसे गार्डनों, डिवाइडरों और अन्य हरित क्षेत्रों की सिंचाई की जाती है. रेवती रेंज की लाइन शुरू होने के बाद हाइड्रेंट की संख्या और बढ़ाई जाएगी. नगर निगम का अगला लक्ष्य बेंगलुरु मॉडल की तर्ज पर उपचारित जल को और उन्नत स्तर तक शुद्ध कर उसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना है.
पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में इंदौर की जल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पुनर्चक्रित जल से पूरा किया जा सकेगा. विशेषज्ञ के अनुसार भूजल के अत्यधिक दोहन को लेकर चिंता भी बनी हुई है. नियमों के अनुसार 10 हजार लीटर प्रति दिन से अधिक पानी निकालने पर प्रतिबंध है, लेकिन कई स्थानों पर बड़े बोरवेलों से स्वच्छ भूजल निर्माण कार्यों में उपयोग किया जा रहा है. विशेषज्ञ इसे भविष्य के जल संकट के लिए गंभीर संकेत मानते हैं. विडंबना यह है कि नगर निगम कम दर पर ट्रीटेड वाटर उपलब्ध करा रहा है, फिर भी टैंकरों और वितरण व्यवस्था की सीमाओं के कारण इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा. पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने पर निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेयजल उपयोगों में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है.
भविष्य में उपयोगिता और मांग बढ़ेगाः महापौर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि ट्रीटेड वॉटर (शोधित जल) का व्यापक और सही उपयोग किया जाए तो यह एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है. उन्होंने कहा कि इंदौर की बढ़ती आबादी को देखते हुए नर्मदा से मिलने वाला लगभग 450 एमएलडी पानी भविष्य की जरूरतों के लिए सीमित हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि पीने के पानी के अलावा मकान निर्माण, बगीचों की सिंचाई और वाहनों की धुलाई जैसे कार्यों में ट्रीटेड वॉटर का उपयोग बढ़ाया जाए, जिससे पेयजल की बचत हो और जल प्रबंधन अधिक टिकाऊ बने. महापौर ने कहा कि भविष्य में ट्रीटेड वॉटर की उपयोगिता और मांग दोनों बढ़ेंगी, इसलिए बड़े निर्माण कार्यों, सर्विस सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इसका अनिवार्य उपयोग होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि नागरिक और संस्थान मिलकर इसे अपनाते हैं तो यह जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक जन आंदोलन बन सकता है.
कोई भी नागरिक प्राप्त कर सकता है शोधित जल
इंदौर नगर निगम के पार्षद एवं एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा ने बताया कि 311 ऐप के माध्यम से कोई भी नागरिक भवन निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए शोधित जल प्राप्त कर सकता है. इसके लिए नगर निगम लगभग 7 रुपये प्रति टैंकर की दर से शुल्क लेता है. उन्होंने बताया कि नगर निगम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ओवरहेड टैंक स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रहा है, जिससे आसपास के उद्यानों और हरित क्षेत्रों को नियमित पानी मिल सकेगा. आवश्यकता पड़ने पर नागरिक भी इन केंद्रों से टैंकर के माध्यम से पानी प्राप्त कर सकेंगे.
पर्यावरणविद् डॉ. दिलीप वागेला के अनुसार, एसटीपी से उपचारित जल का बगीचों, पेड़-पौधों की सिंचाई, फ्लोर वाशिंग और निर्माण कार्यों में उपयोग जल संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी और सराहनीय पहल है. इससे पेयजल स्रोतों पर दबाव कम होता है और स्वच्छ जल का उपयोग अधिक आवश्यक कार्यों के लिए किया जा सकता है. उपचारित जल का पुनः उपयोग सर्कुलर वॉटर मैनेजमेंट का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देता है. कबिटखेड़ी और अन्य एसटीपी केवल सीवेज साफ नहीं कर रहे, बल्कि यह धारणा भी बदल रहे हैं कि गंदा पानी हमेशा बेकार होता है. संभव है कि आने वाले वर्षों में इंदौर की पहचान केवल देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे शहर के रूप में भी हो जिसने अपने नालों को ‘जल बैंक’ में बदल दिया.
