जबलपुर: काशी विश्वनाथ धाम की यात्रा के दौरान वन्दे भारत ट्रेन में चाय की चुसकियों ने जीवन में बड़ा कर गुजरने की राह बना दी। ये कहानी है जबलपुर शहर के इंद्रजीत कुंडे की। एक छोटी-सी कल्पना और सरकार से मिली सहायता ने इस युवा उद्यमी को सफल व्यवसायी बना दिया। इंद्रजीत ने वंदे भारत ट्रेन में इंस्टेंट चाय का स्वाद लिया, उसे अपने व्यवसाय की शुरु करने का विचार आया और बना दिया ईरा अर्थ इंस्टेंट चाय का ब्रांड।
इंद्रजीत ने बताया कि काशी से घर लौटने के बाद चाय पत्ती, शक्कर और मिल्क पाउडर आदि सामग्री से प्रयोग शुरू किये। शुरुआत में कई बार असफलता मिली, लेकिन लगभग 1 साल तक लगातार रिसर्च और प्रैक्टिकल करने के बाद चाय का सही कंपोजिशन तैयार किया गया। उत्पाद को पूरी तरह प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशल फ्लेवर से फ्री रखने के लिए मसाला और इलायची जैसे नेचुरल इंग्रीडिएंट को सीधे पीसकर मिलाया गया। शुरुआती दौर में पैकेजिंग का काम हाथों से किया जाता था, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती थी। इसी दौरान उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की जानकारी मिली। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर आवेदन किया गया और वर्ष 2025 अक्टूबर में योजना के तहत पैकेजिंग मशीन प्राप्त हुई। इंद्रजीत को पीएमएफएमई योजना ने रफ्तार दी और अब वह हर महीने लाखों का कारोबार कर रहे हैं।
इन जगहों पर उपलब्ध हैं उत्पाद
आज इंद्रजीत के उत्पाद राजस्थान के कई हेरिटेज होटलों, उत्तराखंड के देहरादून, जबलपुर, ऋषिकेश तथा केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित प्रतिष्ठानों में उपलब्ध है। खजुराहो के स्टोर्स और मार्ट्स में भी इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है। इंद्रजीत का कहना है कि उनका इंस्टेंट चाय ,होटल ,उद्योग की एक बड़ी समस्या का समाधान कर रहा है। केवल गर्म पानी से तैयार होने वाली यह चाय गैस, समय और मेहनत कम लगती है। हर बार एक समान स्वाद देती है। यही कारण है कि कई होटल और गेस्ट हॉउस में इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।
