
ब्यावरा। धार्मिक उत्सवों में जलने वाले दीपों का विसर्जन करने वाली अजनार का सौंदर्य भी जैसे विसर्जित हो चुका है. नदी में जमा रहने वाली बेतहाशा गंदगी अजनार के सौंदर्य का ऐसा बदनुमा दाग दिखता है जो मिटाएं नहीं मिट रहा है. कचरे में लिपटी अजनार नदी को अब एक बार फिर बारिश का इंतजार है.
शहर के मध्य से गुजरने वाली अजनार नदी के घाट, किनारे और स्टॉप गेट जहां से बारिश का पानी निकास होता है सभी कचरे से घिरे हुए है. नदी का अगर ड्रोन से चित्र लिया जाए तो सफेद कचरे के धब्बे अलग की नजर आएंगे. पूरा ग्रीष्मकाल का समय बीत चुका है, अप्रेल से लेकर जून तक खाली रहने वाली नदी को साफ करने का पर्याप्त और आदर्श समय भी बीत चुका है लेकिन नदी की हालत जस की तस है. नगर का कूढा-कचरा नदी के आंचल में डाला जाकर इसे आठ माह के लिये अजनार नाला बना दिया जाता है. नदी तो यह बमुश्किल बारिश के चार माह ही कहलाती है.
ग्रीष्मकाल बीत चुका है और बारिश सिर पर है. शहर के मध्य से गुजरने वाली अजनार नदी की स्थिति दयनीय है. शहर के
अजनार को लेकर सेलिब्रिटी उत्साहित लेकिन हम मौन
बीते दिनों एक युवक ने अपनी टोली के साथ मिलकर नदी के घाट के कुछ हिस्से की सफाई की थी. उसे लेकर देश के शीर्ष उद्योगपति आनंद महिंद्रा द्वारा भी सराहना की गई थी. एक युवा और सेलिब्रिटी दोनों ही अजनार की फिक्र, उसकी सफाई की सराहना कर चुके है. लेकिन हमारे यहां जिम्मेदारों, संगठनों की ओर से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया, मुहिम नहीं दिखी. इस मर्तबा किसी प्रकार का वृहद स्तर पर नदी का सफाई अभियान भी नजर नहीं आया.
किसी भी हिस्से में जाकर देखा जाए जलकुंभी, पॉलिथिन, मिट्टी के कचरे वाले ढेर और बेतरतीब किनारे उसके स्वरूप को बिगाड़ रहे है. जहां प्राचीन और नए मंदिर, मंदिरों के घाट बने हैं वहां
भी गंदगी का ढेर लगे है. पूरी नदी एक प्रकार से बड़ा विशाल सा कूड़ादान नजर आ रही है. नदी का हर किनारा गंदा नजर आता है. किसी प्रकार की मुहिम के अभाव में अजनार बारिश के
पूर्व अपने नाले के नामकरण से ही पहचानी जा रही है. अब बारिश सिर पर है और मानसून की लहरों से ही शायद नदी का कचरा बहकर शहर के बाहर निकलेगा.
नगर पालिका, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक और धार्मिक संगठन मिलकर अगर एक बार नदी की परिक्रमा करें तो सभी के मन में अजनार के प्रति संवेदना, अपनापन जागेगा उन्हें फिर यह अहसास महसूस होगा कि इससे हमारा पुराना नाता है. आज शहर को जीवन देने वाली नदी हमारे ही कारण खुद वेंटिलेटर पर जा रही है.
नदी के दूषित रहने से ये नुकसान भोगने होंगे
– नदी में यदि लगातार कचरा जमा होता रहा तो उसके तल की मिट्टी जहरीली हो जाएगी.
– नदी में कचरा, पॉलिथिन लगातार पानी के साथ रहने, दलदली में मिले रहने से उसके तल और जल में हानिकारक कैमिकल का उत्सर्जन करेंगे
– नदी का पानी यदि दूषित रहता है तो निश्चित तौर पर उसके आसपास के जला स्त्रोत जैसे कुंए और ट्यूबवेल आदि भी गंदा, दुर्गन्धयुक्त और खनिज रहित पानी देंगे जो कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
– अजनार को सदानीरा रखने के बजाय हम उसे सदा विषा बनाने की ओर बढ़ रहे है.
– नदी के पानी में वर्ष 6 महीने जीवन यापन करने वाले जीव भी मर जाएंगे. इसके साथ ही नदी का जैवविविधता सिस्टम समाप्त हो जाएगा और एक समय ऐसा आएगा कि हमारे हाथ में नदी नही केमिकल, जहर और दलदल का एक स्त्रोत रह जाएगा.
अजनार नदी की फैक्ट फाईल
शहर के भीतर से कुल लंबाई 4 किमी
शहर में नदी की चौड़ाई औसतन – 300 फुट
शहर में कुल घाट
-5
-3
कुल स्टॉप गेट
किनारे पर मंदिरों की संख्या – 7
