नयी दिल्ली, 18 मई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को बताया कि उसने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े धन शोधन मामले में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) आईएएस अधिकारी बसंत गर्ग और अन्य लोगों को समन भेजा है समन में इन अधिकारियों से कहा गया है कि वे आज एजेंसी के सामने संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों के साथ पेश हों। ईडी ने अप्रैल में, अरोड़ा और उनके कारोबारी साझेदारों लुधियाना के हेमंत सूद और जालंधर के चंद्रशेखर अग्रवाल के आवासों और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। बाद में अरोड़ा को संघीय मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी एजेंसी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।
अरोड़ा ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (पहले ‘रितेश प्रॉपर्टीज़ एंड इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड’) के प्रमोटर हैं। यह कंपनी पंजाब में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। उनके बेटे काव्य अरोड़ा वर्तमान में कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं, भी एजेंसी की निगरानी में हैं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि अरोड़ा की कंपनी पर कई कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है। इनमें पंजाब में ज़मीन के इस्तेमाल में अवैध बदलाव करना, शेयरों की कीमतों में हेरफेर करने के लिए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिक्री दिखाना, शेयर बाज़ार में इनसाइडर ट्रेडिंग करना, अवैध धन की ‘राउंड-ट्रिपिंग’ करना, और यूएई से भारत में अवैध सट्टेबाजी का पैसा भेजना शामिल है।
अधिकारी ने आगे बताया कि हेमंत सूद एक वित्तीय निवेश और स्टॉक ब्रोकरेज फर्म, ‘फाइंडॉक फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड’ चलाते हैं, जिसका संचालन लुधियाना, गुरुग्राम और गुजरात के गिफ्ट सिटी में होता है। उन पर आरोप है कि उन्होंने यूएई से अवैध धन की राउंड-ट्रिपिंग करने और इनसाइडर ट्रेडिंग के ज़रिए अपराध से अर्जित धन पैदा करने में अरोड़ा के साथ साझेदारी की थी। सूद पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कई सट्टेबाजी और हवाला ऑपरेटरों को पैसे की लॉन्ड्रिंग करने और एफपीआई मार्ग के ज़रिए उस पैसे को वापस भारत भेजने में मदद की। उन्होंने बताया कि जालंधर के कारोबारी चंद्रशेखर अग्रवाल ने कथित तौर पर शुरुआत में एक क्रिकेट बुकी के तौर पर काम किया था, जिसके बाद उन्होंने हवाला कारोबार में अपना विस्तार किया। उन पर “खिलाड़ी बुक” नाम का एक सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चलाने और हज़ारों लोगों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है। कथित तौर पर यूएई में जमा किया गया अपराध से अर्जित धन, ‘फाइंडॉक’ के ज़रिए वापस भारत लाया गया और अरोड़ा से जुड़े रियल एस्टेट उपक्रमों में निवेश किया गया।
अधिकारी के अनुसार, संजीव अरोड़ा पर शक है कि उन्होंने पंजाब में अवैध सट्टेबाजी करने वालों को अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके सुरक्षा दी, जिसके बदले में उन्हें उनके मुनाफ़े में से हिस्सा मिला। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनियों और कई एंट्री ऑपरेटरों का इस्तेमाल करके बेहिसाब पैसे को वैध निवेश में बदला, जिससे धन शोधन में मदद मिली। उन्होंने बताया कि अरोड़ा की कंपनियों की भी जाँच चल रही है, जिन पर कथित तौर पर नकली एक्सपोर्ट बिल बनाने, यूएई से पैसे की राउंड-ट्रिपिंग करने और ऐसी जीएसटी संस्थाओं से नकली खरीद दिखाने का आरोप है जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है।

