
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने एक अहम आदेश में अदालतों के बीच स्थानांतरित होते रहे आपराधिक प्रकरण में जमा 1.50 लाख रुपये की कोर्ट फीस लौटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता को न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक वित्तीय भार नहीं उठाना चाहिए, जब मामला अंतत: मूल क्षेत्राधिकार से बाहर चला गया हो।
प्रकरण के अनुसार शिकायतकर्ता की ओर से प्रारंभ में ओडिशा के भुवनेश्वर न्यायालय में छह रुपये की नाममात्र कोर्ट फीस के साथ मामला दायर किया गया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के दशरथ रूपसिंह राठौर बनाम महाराष्ट्र राज्य फैसले के आलोक में मामला जबलपुर स्थानांतरित किया गया। इसके अनुपालन में याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश के जेएमएफसी न्यायालय जबलपुर में 1.50 लाख रुपये की कोर्ट फीस जमा की। इसके बाद विधिक प्रावधानों में संशोधन और धारा 138 (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) से जुड़े बदलावों के कारण मामला पुन: ओडिशा स्थानांतरित हो गया। इस दोहरे स्थानांतरण के चलते कोर्ट फीस जबलपुर में ही जमा रह गई और वापसी की मांग की गई। न्यायालय ने रिकार्ड और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद माना कि जब मामला अंतत: भुवनेश्वर, ओडिशा वापस चला गया है तो जबलपुर न्यायालय में जमा की गई फीस का कोई औचित्य नहीं बचता। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि उसे फीस वापसी का अधिकार है। न्यायालय ने मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया है कि वे जेएमएफसी जबलपुर में जमा 1.50 लाख रुपये की कोर्ट फीस की राशि शीघ्र वापस करने की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। पूरी प्रक्रिया तीन माह की समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
