
बालाघाट। मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के ग्राम बंजारपुर स्थित नर्मदा की प्रमुख सहायक बंजर नदी के उद्गम स्थल पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने उद्गम स्थल की परिक्रमा कर जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दिया तथा आमजन से नदियों को प्रदूषण मुक्त और जीवंत बनाए रखने के लिए जनभागीदारी का आह्वान किया।
उद्गम स्थल पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जहां नदियों का उद्गम होता है, वे स्थल अपूर्व ऊर्जा से भरे होते हैं और जहां नदियों का संगम होता है, वहां जीवन की अनंत संभावनाएं जन्म लेती हैं। नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और जीवन का आधार हैं। इन्हें संरक्षित रखना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, अनियंत्रित दोहन और वनों की कटाई के कारण देश की अनेक नदियां संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे समय में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है। नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण, जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण तथा प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा ही नदियों को पुनर्जीवित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
सभी नदी उद्गम स्थलों तक पहुंचने का लिया संकल्प
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि बंजर नदी के उद्गम स्थल पर पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान वे पहले बेतवा नदी के उद्गम स्थल की यात्रा कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश से जुड़ी सभी नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंचने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि अब तक वे 112 नदियों के उद्गम स्थलों का भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां से निकलने वाली नदियां देश के विशाल भूभाग को जीवन प्रदान करती हैं।”
नर्मदा में सर्वाधिक जल लाने वाली प्रमुख सहायक नदी है बंजर
अपने संबोधन में मंत्री श्री पटेल ने कहा कि बंजर नदी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह नर्मदा नदी की ऐसी प्रमुख सहायक नदी है जो छत्तीसगढ़ राज्य से निकलकर मध्यप्रदेश में प्रवेश करती है और नर्मदा में सर्वाधिक जल लेकर आने वाली नदियों में शामिल है। उन्होंने उद्गम स्थल के आसपास निवास करने वाले ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों ने इस पवित्र स्थल की प्राकृतिक सुंदरता और गरिमा को सुरक्षित रखा है, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
नदियों को पुनर्जीवित करने में सहायक बनेगा जल गंगा संवर्धन अभियान
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि वर्षों से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के कारण नदियों के प्राकृतिक तट और जलग्रहण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिससे अनेक नदियां गर्मी के मौसम में सूखने लगी हैं। आज सबसे बड़ी आवश्यकता नदियों को पुनर्जीवित करने की है और जल गंगा संवर्धन अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि नदियों के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में पौधारोपण करेंगे तथा पौधों को वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल और सुरक्षा का दायित्व भी निभाएंगे।
“नदी बचेगी तो जीवन बचेगा”
कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री पटेल ने कहा कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि प्रकृति की धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण,ब पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ से निकलकर बालाघाट और मंडला तक पहुंचती है बंजर नदी
उल्लेखनीय है कि बंजर नदी का उद्गम बालाघाट जिले की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ राज्य के खैरागढ़ जिले के ग्राम बंजारपुर में स्थित है। उद्गम के बाद यह नदी कुछ दूरी तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा का निर्धारण करती हुई बालाघाट जिले में प्रवेश करती है। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह नदी अपने प्रवाह क्षेत्र में लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। नदी के किनारे स्थित रानीधार, खर्राधार और दर्रीघाट जैसे स्थलों पर प्रतिवर्ष कार्तिक मास में विशाल मेलों का आयोजन होता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कान्हा टाइगर रिजर्व की जीवनरेखा है बंजर
बंजर नदी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि यह विश्व प्रसिद्ध कान्हा। टाईगर रिजर्व के विस्तृत वन क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती है। यह नदी वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाती है तथा जंगल में निवास करने वाले असंख्य वन्य प्राणियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। लगभग 150 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद बंजर नदी बालाघाट से मंडला जिले के महाराजपुर क्षेत्र में पहुंचती है और अंततः पवित्र नर्मदा नदी में समाहित हो जाती है।
आस्था का प्रमुख केंद्र है बंजर-नर्मदा संगम
नर्मदा और बंजर नदी का संगम स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है। विशेष रूप से अस्थि विसर्जन, पिंडदान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए लोग बड़ी संख्या में इस पवित्र संगम स्थल पर पहुंचते हैं।
कार्यक्रम में नगर पालिका मलाजखंड के अध्यक्ष श्री मानसिंह मेरावी, उपाध्यक्ष श्रीमती त्रिवेणी गोस्वामी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री उमेश देशमुख, जनपद सदस्य श्री देवन मरकाम, श्री आनंद कोछड़़, श्री ढालसिंह चौधरी, योगेश ठाकरे, टोपराम पटले, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सरपंचगण तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
