राज्यसभा प्रत्याशियों को जल्दबाजी में निर्वाचित घोषित करना लोकतंत्र पर सवाल : पांसे

बैतूल: मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे ने भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई से पहले निर्वाचित घोषित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाला कदम बताया है।श्री पांसे ने जारी बयान में कहा कि कांग्रेस द्वारा निर्वाचन आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और मामला न्यायिक विचाराधीन है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा में दिखाई गई जल्दबाजी न्यायिक प्रक्रिया और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि होती है। यदि विपक्ष द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों और आपत्तियों का समाधान किए बिना चुनाव परिणाम घोषित किए जाते हैं तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ सकता है।कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता लोकतंत्र की आधारशिला हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को सुनना और शिकायतों का उचित निराकरण करना आवश्यक है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सभी वैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों का उपयोग करेगी। श्री पांसे ने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका और संबंधित संवैधानिक संस्थाएं मामले में निष्पक्षता बरतते हुए सभी तथ्यों पर विचार करेंगी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करेंगी।

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