छतरपुर: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ कृषि प्रधान छतरपुर जिले में उर्वरकों की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। कृषि विभाग के तकनीकी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले में विभिन्न फसलों के लिए 84,630 मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता आंकी गई है, जबकि 1 अप्रैल 2026 से अब तक जिले में केवल 18,327.28 मीट्रिक टन उर्वरक की ही आवक हो सकी है। यह कुल मांग का महज 21.66 प्रतिशत है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में जिले में 17,665.66 मीट्रिक टन उर्वरक का बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिसे सेवा सहकारी समितियों, विपणन संघ, निजी विक्रेताओं और कंपनी वेयरहाउस में सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा 159.35 मीट्रिक टन उर्वरक की खेप भी जिले में पहुंचने वाली है।
खाद वितरण को व्यवस्थित करने और बिचौलियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा ई-विकास पोर्टल और ई-टोकन प्रणाली लागू की गई है। लेकिन लगातार सर्वर डाउन रहने और तकनीकी खामियों के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरपालपुर और महोबा सीमा क्षेत्र के किसान टोकन प्राप्त करने के लिए इंटरनेट केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सर्वर की समस्या के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से ई-टोकन के लिए 15 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है, लेकिन किसानों का आरोप है कि कई एमपी ऑनलाइन केंद्रों पर 50 से 100 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। वहीं धीमे सर्वर के कारण घंटों इंतजार के बाद भी कई बार टोकन जारी नहीं हो पा रहे हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
उर्वरकों की उपलब्धता का हाल
जिले में यूरिया की 7 हजार मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 2,494.37 मीट्रिक टन, डीएपी की 24,400 मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 3,770.50 मीट्रिक टन, एनपीके की 30,500 मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 8,624.31 मीट्रिक टन, पोटाश की 6 हजार मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 321.15 मीट्रिक टन तथा एसएसपी की 16,730 मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 3,116.95 मीट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता दर्ज की गई है।
किसानों ने उठाई व्यवस्था सुधारने की मांग
किसानों का कहना है कि यदि सर्वर संबंधी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया और टोकन के नाम पर हो रही कथित अवैध वसूली पर रोक नहीं लगी, तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने और तकनीकी खामियों को दूर करने की मांग की है। वहीं प्रशासन का दावा है कि जिले में पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है।
