लंदन/बर्लिन | भविष्य के सपने संजोकर यूरोप जाने वाले प्रवासियों के लिए स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। ब्रिटेन, जर्मनी और आयरलैंड जैसे देशों में मकानों की कमी, महंगाई और संसाधनों पर बढ़ते बोझ को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा हिंसक प्रदर्शनों में तब्दील हो रहा है। बेलफास्ट और डबलिन जैसी जगहों पर प्रवासियों और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाकर की गई तोड़फोड़ ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
वीजा नियमों में सख्ती का असर
इस बढ़ते ‘एंटी-माइग्रेंट’ माहौल का सीधा असर भारतीय छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ना तय है। ब्रिटेन जैसे देशों ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा नियमों को कड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि प्रवासियों की बढ़ती संख्या को सीमित करने के दबाव में सरकारें भविष्य में वर्क परमिट, स्टूडेंट वीजा और स्थायी निवास की प्रक्रियाओं को और अधिक जटिल बना सकती हैं।
कुशल प्रवासियों के लिए अनिश्चित भविष्य
यूरोप की तेजी से बूढ़ी होती आबादी को कुशल कर्मचारियों की सख्त जरूरत है, फिर भी राजनीतिक दबाव के कारण प्रवास नीतियों में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अवसर पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, लेकिन आने वाले समय में वीजा और इमिग्रेशन की राह पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होने वाली है। प्रवासियों के प्रति बढ़ती नफरत विदेशी समुदायों के लिए असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही है।

