नयी दिल्ली, 10 जून (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1,400 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुद (अलीबाग के पास) में अरब सागर के सामने स्थित एक आलीशान संपत्ति को कुर्क किया है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 60 करोड़ रुपये है।
ईडी के इंदौर क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह संपत्ति मेसर्स एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (एसकेएनएल) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नितिन कासलीवाल के लाभकारी स्वामित्व में है। यह कार्रवाई भारतीय बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ की गई धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।
इससे पहले, ईडी ने यूनाइटेड किंगडम के लंदन में बकिंघम पैलेस के पास लगभग 119.55 करोड़ रुपये मूल्य की एक हाई-वैल्यू संपत्ति को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इस ताजा कार्रवाई के साथ, इस मामले में कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग 179.55 करोड़ रुपये हो गया है।
ईडी के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि नितिन शंभूकुमार कासलीवाल ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नियंत्रण वाली अंतर्संबंधित संस्थाओं और समूह कंपनियों के एक नेटवर्क का उपयोग करके धन की हेराफेरी की और उसे कई स्तरों पर घुमाया। यह हेराफेरी उस अवधि के दौरान की गई जब एसकेएनएल ने बैंकों के कंर्सोटियम से भारी ऋण सुविधाएं ली हुई थीं।
एजेंसी ने बताया कि विभिन्न खातों में भेजे गये इस धन का अंतिम उपयोग रायगढ़ के मुरुद में अरब सागर के सामने स्थित इस संपत्ति को खरीदने के लिए किया गया था। इसलिए, एसकेएनएल बैंक धोखाधड़ी की जारी जांच में इस संपत्ति की पहचान सीधे तौर पर ‘अपराध की कमाई’ से अर्जित संपत्ति के रूप में की गई है।
ईडी ने आरोप लगाया कि विभिन्न बैंकों द्वारा एसकेएनएल को जारी की गई ऋण राशि को कासलीवाल के नियंत्रण वाली संबंधित संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से घुमाया गया था, जिसका एक हिस्सा अंततः अलीबाग के पास इस आलीशान समुद्र तटीय संपत्ति को खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले, 23 दिसंबर 2025 को ईडी ने छापेमारी की थी और कथित तौर पर विदेशी ट्रस्टों और कॉर्पोरेट संरचनाओं के माध्यम से रखी गई विदेशी संपत्तियों से जुड़े सबूत बरामद किए थे। जांच के दौरान मिली सामग्री के आधार पर, एजेंसी ने बाद में लंदन में बकिंघम पैलेस के पास स्थित लगभग 119.55 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी।
बैंकों के संघ के साथ की गई इस धोखाधड़ी के माध्यम से कथित रूप से अर्जित की गई ‘अपराध की अन्य कमाई’ और संपत्तियों का पता लगाने तथा उनकी पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।
