रूस ने पुतिन के साथ बातचीत के लिए ज़ेलेंस्की के खुले पत्र को खारिज किया, ‘प्रचार का हथकंडा’ दिया करार

सेंट पीटर्सबर्ग/कीव, 10 जून (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वैसिली नेबेंज़िया ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेजे गये खुले पत्र को खारिज करते हुए इसे शांति वार्ता की गंभीर पहल के बजाय “प्रचार का सस्ता हथकंडा”करार दिया है।

रूसी सरकारी मीडिया संस्थान आरटी की रिपोर्ट के अनुसार, श्री जेलेंस्की ने पिछले सप्ताह यह पत्र उस समय जारी किया था जब श्री पुतिन ने कहा था कि रूस अब भी यूक्रेन के साथ कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है। पत्र में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पुतिन पर कई आरोप लगाते हुए कहा था कि दोनों नेताओं के बीच सीधी मुलाकात से युद्ध समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में सोमवार को बोलते हुए नेबेंजिया ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने इसे कीव की “लाउडस्पीकर कूटनीति” का एक और उदाहरण बताते हुए कहा कि यह किसी भी तरह से शांति पहल नहीं बल्कि वार्ता की संभावनाओं को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि रूस तथाकथित “दिखावटी वार्ताओं” या सार्वजनिक मंचों पर होने वाले राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बनने का इच्छुक नहीं है। युद्ध शुरू होने के बाद से श्री जेलेंस्की और श्री पुतिन के बीच आमने-सामने बातचीत की मांग समय-समय पर उठती रही है। श्री जेलेंस्की प्रत्यक्ष वार्ता की वकालत करते रहे हैं, लेकिन उन्होंने रूस जाने से इनकार किया है और रूस की उस मांग को भी अस्वीकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेनी सेना से डोनबास क्षेत्र से पीछे हटने को युद्धविराम की शर्त बताया गया था।

श्री पुतिन ने पत्र के जवाब में कहा कि ऐसी बैठक के लिए आवश्यक परिस्थितियां फिलहाल मौजूद नहीं हैं। उनके विदेश नीति सलाहकार युरी उशाकोव ने पत्र को “कई पन्नों की अभद्र भाषा” बताया, जबकि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि यूक्रेन वास्तव में वार्ता नहीं चाहता। इस बीच, श्री जेलेंस्की ने लंदन में ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के नेताओं से मुलाकात की। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तत्काल युद्धविराम की मांग की गयी और संघर्ष समाप्त होने के बाद यूक्रेन में नाटो सैनिकों की तैनाती की योजना दोहरायी गयी। रूस पहले ही ऐसे किसी प्रस्ताव को खारिज कर चुका है।

श्री जेलेंस्की और श्री पुतिन के बीच यह पत्राचार ऐसे समय हुआ जब रूस में सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच आयोजित किया जा रहा था। इसी दौरान यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया। श्री नेबेंजिया ने सुरक्षा परिषद में अपने संबोधन के दौरान रूसी नागरिकों पर हुए कथित हमलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने स्टारोबेल्स्क में एक स्कूल छात्रावास पर ड्रोन हमले तथा मॉस्को से सिम्फेरोपोल जा रही एक यात्री बस और ट्रेन पर हमलों का उल्लेख किया।

उन्होंने पश्चिमी देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूक्रेनी हमलों के पीड़ितों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है ताकि यूक्रेनी सरकार को आलोचना से बचाया जा सके। रूसी राजनयिक ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के बावजूद यूक्रेन को पश्चिमी देशों से लगातार राजनीतिक और वित्तीय समर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार, पश्चिमी देश यूक्रेन को रूस के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा मानते हैं और इसी कारण कीव को समर्थन देना जारी रखे हुए हैं। श्री नेबेंजिया ने आरोप लगाया कि पश्चिमी नेतृत्व यूक्रेन की राजनीतिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार से परिचित है, लेकिन इसके बावजूद वह सहायता उपलब्ध करा रहा है, जिससे संघर्ष और लंबा खिंच रहा है।

 

 

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