इंदौर: उच्च शिक्षा को किताबों से निकालकर समाज की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को आसपास की आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत विद्यार्थी सीधे आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़कर बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों में भागीदारी करेंगे.
नई व्यवस्था में शिक्षा, मनोविज्ञान, समाज कार्य और गृह विज्ञान जैसे विषयों के छात्र तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को खेल, कहानियों, चित्रकारी और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से स्कूल शिक्षा के लिए तैयार करेंगे. साथ ही वे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की निगरानी, कुपोषित बच्चों की पहचान, ग्रोथ चार्ट तैयार करने तथा टीकाकरण संबंधी रिकॉर्ड के संधारण में भी सहयोग देंगे. इस पहल के तहत विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को स्कूल शिक्षा के लिए तैयार करना होगी. इसके लिए वे कहानियों, चित्रकारी, कठपुतली, खेल गतिविधियों और रचनात्मक शिक्षण विधियों का उपयोग करेंगे
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है पहल
विद्यार्थी ‘पोषण ट्रैकर’ एप पर डेटा अपडेट करने और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तकनीकी व प्रशिक्षण संबंधी सहायता भी प्रदान करेंगे. यह पहल नई शिक्षा नीति के तहत इंटर्नशिप और फील्ड वर्क को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह न केवल विद्यार्थियों के कौशल विकास में मदद करेगी, बल्कि बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
