इंदौर:लगातार आठवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने के दावों के बीच, इंदौर नगर निगम के वाहनों की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही की गंभीर खबरें सामने आ रही हैं. एक ओर स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर कचरा संग्रहण वाहन, डंपर और पानी के टैंकर जैसे जनसेवा के वाहनों की स्थिति खराब है.शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन डंपर और पानी के टैंकरों की हालत चिंताजनक है. अधिकांश वाहनों में लाइट खराब बंपर टूटे हुए दरवाजे रस्सियों से बंधे और पहचान के लिए नेम प्लेट तक गायब हैं.
कई पानी के टैंकर तो सडक़ों पर चलते खतरे बन चुके हैं, जिनसे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. वाहन चालकों की जान जोखिम में है और आम नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. सवाल सीधा है जब हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों-करोड़ों का बजट पास होता है तो यह पैसा आखिर जा कहां रहा है? क्या यह महज कागजों तक सीमित है? जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही सवाल खड़े कर रही है. यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह मुद्दा केवल बदहाल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है.
यह बोले नागरिक…
जनसेवा वाहन खटारा हालत में दौड़ रहे हैं. मेंटेनेंस पर खर्च दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत सबके सामने है. आखिर जनता के टैक्स का पैसा कहां जा रहा है, इसकी जवाबदेही तय होना चाहिए.
– किशोर डोंगरे
निगम के इन वाहनों में न लाइट सही है, न ब्रेक की गारंटी. चालक और आम नागरिक दोनों खतरे में हैं, ऐसी लापरवाही किसी दिन जानलेवा साबित हो सकती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
– प्रवीण मिश्रा
स्थिति सुधारने के लिए निगम सभी वाहनों का तत्काल टेक्निकल ऑडिट करवाए, खराब और कंडम वाहनों को हटाकर नए और सुरक्षित वाहन लाए जाएं, मेंटेनेंस बजट की पारदर्शी जांच हो और लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो.
– इकबाल खान
