
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट से विधि छात्रों को राहत मिली है। जस्टिस जीएस आहलूवालिया व जस्टिस दीपक खोत की अवकाशकालीन पीछ ने 10 जून को होने वाली परीक्षा में उन्हें शामिल करने के निर्देश दिये है। इसके साथ ही अनावेदकों को नेाटिस जारी कर जवाब जवाब तलब किया है। युगलपीठ ने मामले की सुनवाई संबंधित अन्य याचिका के साथ संयुक्त रूप से करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की है।
यह मामले में सागर बीना निवासी अमित दांगी, गौरव राजपूत, कपिल व अन्य की ओर से दायर किये गये थे। जिनकी ओर से अधिवक्ता स्मिता वर्मा अरोरा ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि आवेदकों को छठवें सेमेस्टर में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिसका कारण यह बताया गया कि 50 फीसदी से कम अंक है। जबकि अब केवल द्वितीय श्रेणी के उम्मीदवारों को ही उसकी पात्रता है। आवेदकों की ओर से कहा गया कि 45 फीसदी के ऊपर वाले द्वितीय श्रेणी के माने जाते थे, उसके नीचे तृतीय श्रेणी निर्धारित थी। आवेदक पचास फीसदी अंकों की पात्रता रखते है और पूर्व के एग्जाम देते आये है। दलील दी गई कि इसके पूर्व भी ऐसे मामलों में अभ्यार्थियों को राहत दी गई। मामले में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग, रजिस्ट्रार महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विवि, प्रिंसिपल लॉ कालेज सागर व परीक्षा नियंत्रक विवि को पक्षकार बनाया गया है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश दिये।
