इंदौर:अब इंदौर की हाईटेंशन बिजली लाइनों पर सिर्फ इंसान नहीं, बल्कि ‘थर्मल नजर’ भी निगरानी कर रही है. बिजली वितरण कंपनी ने शहर में ऐसा तकनीकी सिस्टम लागू किया है, जो लाइनों के भीतर छिपी गर्मी की हलचल को पकड़कर संभावित बड़े फाल्ट से पहले ही चेतावनी दे रहा है.शहर की 33 केवी और 11 केवी लाइनों पर थर्मोविजन कैमरों की तैनाती के बाद बिजली व्यवस्था अब पहले से कहीं ज्यादा ‘स्मार्ट’ हो गई है. ये कैमरे उन छोटे-छोटे ‘रेड हॉट प्वाइंट्स’ को भी पकड़ रहे हैं, जो आगे चलकर बड़े ब्रेकडाउन या ब्लैकआउट की वजह बन सकते थे.
40 फीट दूर से पकड़ में आ रहा खतरा
इन कैमरों की खासियत यह है कि ये 20 से 40 फीट दूर से ही लाइनों और ग्रिड में बढ़ते तापमान को भांप लेते हैं. जहां आम नजर को कुछ भी असामान्य नहीं दिखता, वहीं ये कैमरे ‘छिपी हुई गर्मी’ को रेड अलर्ट में बदल देते हैं.
जैसे ही कोई हॉट स्पॉट मिलता है, सिस्टम तुरंत इंजीनियरों और मेंटेनेंस टीम को अलर्ट भेज देता है. फिर तय प्रक्रिया के तहत सिर्फ 5 से 10 मिनट के लिए सप्लाई रोककर उस जगह की मरम्मत कर दी जाती है- और बड़ा फाल्ट बनने से पहले ही मामला खत्म.
44 डिग्री की गर्मी में बनी ‘लाइफलाइन’
मई महीने की भीषण गर्मी, जब तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया था और बिजली की मांग चरम पर थी, उसी दौरान इन कैमरों ने सबसे बड़ी परीक्षा पास की. ओवरलोड और गर्मी के कारण लाइनों में बढ़ रही थर्मल एक्टिविटी को समय रहते पकड़कर कई बड़े फॉल्ट टाल दिए गए. अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां अचानक ट्रिपिंग और बड़े फाल्ट की घटनाएं ज्यादा होती थीं, अब उनमें साफ कमी देखी जा रही है.
रेड हॉट प्वाइंट बड़ा खतरे का संकेत
बिजली लाइनों में अगर किसी जोड़, कनेक्शन या उपकरण में ज्यादा गर्मी पैदा होती है, तो वह धीरे-धीरे बड़े फाल्ट में बदल सकता है. थर्मोविजन कैमरे ऐसे हर पॉइंट को तुरंत ‘रेड हॉट’ के रूप में चिन्हित कर देते हैं- यानी खतरा अभी छोटा है, लेकिन भविष्य में बड़ा हो सकता है.
डेढ़ से दो लाख की आंखें, जो बिजली को बचा रही हैं
इन हाईटेक कैमरों की कीमत लगभग 1.5 से 2 लाख रुपये तक है. लेकिन यह तकनीक अब बिजली व्यवस्था के लिए ‘नुकसान रोकने वाली इन्वेस्टमेंट’ साबित हो रही है. इनका इस्तेमाल सिर्फ बिजली सेक्टर में ही नहीं, बल्कि स्टील और भारी उद्योगों में भी होता है, जहां गर्मी और करंट की निगरानी बेहद जरूरी होती है.
बिजली व्यवस्था में तकनीक का नया दौर
यह कदम इंदौर की बिजली व्यवस्था को ‘रिएक्टिव मेंटेनेंस’ से ‘प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस’ की ओर ले जा रहा है- यानी अब खराबी होने के बाद नहीं, बल्कि होने से पहले ही उसे रोका जा रहा है. नतीजा साफ है- कम फाल्ट, कम ब्रेकडाउन और ज्यादा भरोसेमंद बिजली सप्लाई।
