इंदौर में ‘फ्रेश जूस’ पर गंदगी का आलम, फ्रोजन पल्प और खराब तापमान नियंत्रण से स्वास्थ्य जोखिम

इंदौर: गर्मियों में ताजे फलों का जूस स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इंदौर के कई जूस सेंटरों और सड़क किनारे संचालित जूस गाड़ियों की हकीकत इस भरोसे पर सवाल खड़े कर रही है. खाद्य सुरक्षा विभाग के निरीक्षण में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है. ऐसे में यह चिंता बढ़ गई है कि लोग सेहत सुधारने के लिए जूस पी रहे हैं या अनजाने में अपनी सेहत को खतरे में डाल रहे हैं.

मिक्सर में कई जूस, सफाई का अभाव
शहर के कई जूस सेंटरों पर बिना उचित सफाई के मिक्सर में लगातार अलग-अलग फलों का जूस तैयार किया जा रहा है. मिक्सर और अन्य उपकरणों की नियमित सफाई नहीं होने से संक्रमण और खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी बैक्टीरिया के तेजी से पनपने का कारण बन सकती है.

फ्रोजन फ्रूट पल्प का बढ़ता इस्तेमाल
कई जूस सेंटर मौसमी और ताजे फलों के बजाय फ्रोजन फ्रूट पल्प का उपयोग कर रहे हैं. यह पल्प लंबे समय तक कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है और बाद में जूस बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार यदि फ्रोजन पल्प को निर्धारित माइनस तापमान पर लगातार सुरक्षित रखा जाए तो सामान्यतः इससे कोई समस्या नहीं होती. लेकिन कोल्ड चेन टूटने या तापमान नियंत्रण में गड़बड़ी होने पर पल्प की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उसके खराब होने की आशंका बढ़ जाती है.

कोल्ड स्टोरेज में मिलीं गंभीर अनियमितताएं
चित्र- मनीष स्वामी
खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि हाल के निरीक्षणों में कई कोल्ड स्टोरेज और गोदामों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं. कुछ स्थानों पर तापमान मापने वाले मीटर और डिस्प्ले खराब मिले, जबकि कई जगह निर्धारित तापमान बनाए रखने की व्यवस्था नहीं थी. कई कोल्ड स्टोरेज में कैलिब्रेशन संबंधी खामियां भी सामने आईं, जिसके चलते विभाग ने कार्रवाई की.
उन्होंने बताया कि फ्रोजन फलों और पल्प को निर्धारित तापमान से नीचे सुरक्षित रखना जरूरी होता है. तापमान नियंत्रण में गड़बड़ी आने पर उत्पाद खराब हो सकता है और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है.

तापमान मानकों के अनुरूप नहीं
विभाग के अनुसार अधिकांश जूस गाड़ियों और छोटे जूस सेंटरों में लगे डीप फ्रीजर आवश्यक तापमान बनाए रखने में सक्षम नहीं होते. कई स्थानों पर फ्रीजर का तापमान मानकों के अनुरूप नहीं होता जिससे फ्रोजन पल्प और फलों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है.

प्राकृतिक गुण हो सकते हैं प्रभावित
चित्र- डॉ. संतोष वर्मा
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संतोष वर्मा के अनुसार फलों को ऑक्सीकरण से बचाकर फ्रोजन किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक संरक्षित रखने की प्रक्रिया में उनके कुछ प्राकृतिक गुण प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि ऐसे पल्प का उपयोग जल्द से जल्द किया जाना चाहिए, क्योंकि सामान्य तापमान पर आने के बाद उसके खराब होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
डॉ. वर्मा ने कहा कि अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार जूस बच्चों और वयस्कों दोनों में उल्टी, डायरिया और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. गर्मी के मौसम में लोगों को अधिक से अधिक ताजे और प्राकृतिक फलों से तैयार जूस का सेवन करना चाहिए.

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