नयी दिल्ली 07 जून (वार्ता) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को यहां भूमि पत्तन प्रबंधन प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ करेंगे जिसके साथ देश के सीमा प्रबंधन के डिजिटलकरण में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल ‘स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट’ के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। इसका उद्देश्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी समाधानों के माध्यम से सीमा पार व्यापार और यात्रियों की आवाजाही को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
इस अवसर पर गृहमंत्री डॉकी और श्रीमंतपुर भूमि बंदरगाहों पर नवनिर्मित आवास सुविधाओं का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे सीमा सुरक्षा कर्मियों और अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों के लिए बुनियादी ढांचागत सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा।
इस प्रणाली का शुभारंभ भारत की आधुनिक और तकनीक-सक्षम स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। यह व्यापार सुगमता, कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की राष्ट्र की रणनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे सभी भूमि बंदरगाहों के परिचालन को एक एकीकृत प्रणाली में संयोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लॉजिस्टिक्स और रेगुलेटरी सूचनाओं के सुरक्षित और रियल-टाइम में आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है, जिससे भूमि बंदरगाहों को हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों पर संचालित डिजिटल प्रणालियों के समकक्ष लाया जा सकेगा। एक तटस्थ और खुले प्लेटफॉर्म के रूप में यह सरकारी एजेंसियों और निजी ऑपरेटरों सहित विभिन्न हितधारकों के बीच निर्बाध समन्वय को सुविधाजनक बनाएगा, जिससे विलंब में कमी आएगी और परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी।
उल्लेखनीय है कि भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, जो व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमि बंदरगाहों के विकास और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है।
वर्ष 2014-15 के बाद से, भूमि बंदरगाहों के माध्यम से होने वाला आयात-निर्यात व्यापार लगभग 5,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 82,800 करोड़ और 2025-26 में 73,300 करोड़ रहा। कार्गो वाहनों की संख्या 1.1 लाख से बढ़कर 2024-25 में 6.69 लाख (2025-26 में 6.63 लाख) हो गई है, जबकि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद यात्रियों की आवाजाही 1.7 लाख से बढ़कर 2024-25 में 25.8 लाख हो गई, जो 2025-26 में 11.90 लाख दर्ज की गई।
