
सोयतकलां। एक ओर प्रशासन विश्व पर्यावरण दिवस पर बड़े बड़े आयोजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, पौधारोपण अभियान चलाकर हरियाली बढ़ाने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सोयतकलां क्षेत्र में हरे भरे वृक्षों की अवैध कटाई लगातार जारी है. इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में लकड़ी माफिया और ठेकेदार बेखौफ होकर हरेभरे पेड़ों पर आरी चला रहे हैं. कटे हुए वृक्षों की लकड़ी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरकर ऊपर से बरसाती और तिरपाल से ढंक दी जाती है, ताकि किसी की नजर न पड़े. दिन हो या रात, लकड़ी का परिवहन खुलेआम किया जा रहा है, सोयतकलां से राजस्थान की ओर लगातार लकड़ी का परिवहन हो रहा है लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अनजान बने हुए हैं.
ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे…?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी मीडिया द्वारा समाचार प्रकाशित किया जाता है या शिकायतें सामने आती हैं तब केवल औपचारिकता निभाने के लिए कार्रवाई का दिखावा किया जाता है. कुछ समय तक हलचल रहती है, फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है और अवैध कटाई का खेल दोबारा शुरू हो जाता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पर्यावरण दिवस पर लाखों रुपये खर्च कर पौधे लगाने और पर्यावरण बचाने के संदेश दिए जा रहे हैं तब वर्षों पुराने हरे भरे वृक्षों को बचाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे. एक पेड़ को बड़ा होने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ ही मिनट लगते हैं. यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर पर्यावरणीय संकट, जलस्तर में गिरावट और बढ़ते तापमान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पर्यावरण दिवस को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि अवैध वृक्ष कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर क्षेत्र की हरियाली को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं. अन्यथा पर्यावरण संरक्षण के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे.
