नई दिल्ली | नीट पेपर लीक मामले की आरोपी मनीषा वाघमारे ने वर्टिगो (Vertigo) बीमारी का हवाला देते हुए अदालत से जमानत की मांग की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि नियमित इलाज के अभाव में जेल में रहना उसके लिए कठिन है। हालांकि, अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल चिकित्सकीय समस्याओं को सीधे जमानत का आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि जेल प्रशासन कैदियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम है।
सरकारी पक्ष का विरोध और जांच की स्थिति
सरकारी वकील ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि जेल में स्वास्थ्य बिगड़ने पर आरोपी के लिए तुरंत उपचार की व्यवस्था की जा सकती है। वर्तमान में यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां जांच एजेंसियां पेपर लीक के आर्थिक नेटवर्क और आरोपियों की संलिप्तता की गहन जांच कर रही हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मनीषा वाघमारे पर लगे गंभीर आरोप
पुणे से गिरफ्तार मनीषा वाघमारे पर नीट पेपर लीक नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। जांच में खुलासा हुआ है कि एक ब्यूटी पार्लर चलाने वाली वाघमारे का पिछले तीन वर्षों से मुख्य आरोपियों के साथ संपर्क था। पुलिस और सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि एडमिशन दिलाने के नाम पर उसके और आरोपियों के बीच पैसों का लेनदेन किस प्रकार हुआ। अब कोर्ट के अंतिम आदेश पर ही यह स्पष्ट होगा कि उसे राहत मिलती है या याचिका खारिज होती है।

