फार्मर रजिस्ट्री में खराब प्रदर्शन प्रदेश में नीचे से चौथे स्थान पर जिला 

सतना: जिले में राजस्व मामलों के निपटारे और फार्मर रजिस्ट्री के काम में सुस्ती को लेकर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने कड़ा रुख अपनाया है।
गुरुवार को आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि कोई भी सीमांकन का मामला 3 महीने से अधिक समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन, आरसीएमएस पोर्टल और लोक सेवा गारंटी के तहत दर्ज सीमांकन के सभी लंबित प्रकरणों को 15 जून तक हर हाल में निराकृत करने की समय-सीमा तय की है।

सीमांकन के 1281 मामले अभी भी अटके
राजस्व न्यायालयवार समीक्षा के दौरान सामने आया कि आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज कुल मामलों में से केवल 52.7 प्रतिशत का ही निपटारा हो सका है। पोर्टल पर सीमांकन के कुल 4,483 मामले दर्ज थे, जिनमें से 3,202 का निराकरण किया जा चुका है, लेकिन 1,281 मामले अभी भी लंबित हैं।
इसके अलावा लोक सेवा गारंटी के तहत सीमांकन के 262, नामांतरण के 21, अभिलेख दुरुस्ती के 31 और बंटवारा के 15 मामले लंबित पाए गए, जिन्हें 15 जून तक खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।कलेक्टर ने जिले में फार्मर रजिस्ट्री की बेहद धीमी रफ्तार पर नाराजगी व्यक्त की।

आंकड़ों के मुताबिक:

जिले में कुल आठ लाख नौ हज़ार दो सौ तेरह भूस्वामियों के मुकाबले अब तक केवल दो लाख ग्यारह हजार नौ सौ सत्तासी फार्मर रजिस्ट्री (26.20%) ही पूरी हो सकी है।यह आंकड़ा राज्य के औसत (35.36%) से काफी कम है, जिसके कारण जिला पूरे प्रदेश में नीचे से चौथे स्थान पर है।कलेक्टर ने लक्ष्य दिया कि रणनीति बनाकर काम करें और जिले को प्रदेश के टॉप 10 से 20 जिलों की सूची में लेकर आएं। जिले भर से पीड़ित अपना आवेदन लेकर जन सुनवाई में भी अपनी राजस्व संबंधी शिकायतों को लेकर पहुँच रहे थे , किसी का बटवारा तो
रघुराजनगर नगरीय तहसील में सबसे कम सिर्फ 12% काम हुआ है। वहीं रघुराजनगर ग्रामीण के बाबूपुर हल्के में 337 भूस्वामियों में से मात्र 4 और मझबोगवां के 84 में से केवल 4 भूस्वामियों की रजिस्ट्री होने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके अलावा शहर से सटे करही हरमल्ला, मटेहना, गिदुरी, इटौरा और अमौधा खुर्द हल्कों में भी काम बेहद सुस्त मिला।
89 गांवों के नक्शे ऑनलाइन अपलोड
बैठक में स्वामित्व योजना, मानसून की तैयारियों और लंबित राहत प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। एसएलआर एल.एम. पाण्डेय ने बताया कि जिले के 89 गांवों के नक्शे ऑनलाइन अपलोड किए जा चुके हैं, जबकि शेष 14 नक्शों को अपलोड करने की प्रक्रिया तेजी से जारी

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