नयी दिल्ली, 05 जून (वार्ता) सरकार ने वैश्विक पूंजी बाजार के वर्तमान हालात के बीच घरेलू कर व्यवस्था के महत्व को देखते हुए देश में पूंजी निवेश को आकर्षक बनाने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश पर लागू कर व्यवस्था में बड़ा सुधार किया है और ऐसे निवेश से होने वाली ब्याज आय या पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट देने की घोषणा की है।
वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि यह कदम सरकारी प्रतिभूतियों में करारोपण की व्यवस्था को भारत जैसे अन्य देशों की व्यवस्था के अनुरूप बनायेगा। मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह छूट पहली अप्रैल 2026 से लागू होगी। इसका अर्थ है कि जी-सेक में निवेश के संबंध में इस साल पहली अप्रैल को या उसके बाद एफपीआई को होने वाले किसी भी ब्याज या पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट लागू होगी।
विज्ञप्ति के मुताबिक बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटिलमेंट (बीआईएस) को भी भारत की सरकारी-प्रतिभूतियों में अपने निवेश पर कर में इसी तरह की छूट प्राप्त होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में विदेशों से पैसिव फंड और पेंशन फंडों, बीमा कंपनियों और सरकारी सम्पत्ति कोषों(एसडब्ल्यूएफ) जैसे दीर्घकालिक निवेशकों से दीर्घकालिक और मजबूत पूंजी निवेश का प्रवाह होने की उम्मीद है। सरकार ने इसके साथ ही बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निवेश को सुगम बनाने और स्थिर दीर्घकालिक विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के उद्देश्य से कई उपाय किए हैं।
सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से, सरकार ने पूर्णतः सुलभ मार्ग (एफएआर) के अंतर्गत निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की सूची का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। इसमें 15, 30 और 40 वर्षों की अवधि के सरकारी प्रतिभूतियों के नए निर्गमों के साथ-साथ एफएआर-पात्र प्रतिभूतियों की अवधि के संप्रभु हरित बांड (एसजीआरबी) को भी शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सामान्य मार्ग के अंतर्गत एफपीआई निवेशों के संबंध में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर लागू तीन प्रतिबंधों, अर्थात् अल्पकालिक निवेश सीमा, एकाग्रता सीमा और प्रतिभूति-वार सीमा को हटाने का निर्णय लिया गया है।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के बकाया स्टॉक के छह प्रतिशत और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) के दो प्रतिशत की समग्र मात्रात्मक निवेश सीमा को बरकरार रखा गया है। निवेश सीमाओं की उप-श्रेणियां, अर्थात् ‘सामान्य’ और ‘दीर्घकालिक’, क्रमशः सरकारी प्रतिभूतियों और एसजीएस में निवेश के लिए एक ही सीमा में विलय कर दी जाएंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में घोषणा की थी कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) को पोर्टफोलियो निवेश योजना के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों की शेयर प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी, जो अब तक केवल एनआरआई अथवा ओसीआई के लिए उपलब्ध थी।
उल्लेखनीय है कि इस बार के बजट में कहा गया था कि इस योजना के तहत किसी भी कंपनी में एक व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए निवेश सीमा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी जाएगी, जबकि सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा वर्तमान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी जाएगी।
वित्त मंत्रालय की आज जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार बजट के इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए, आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण उपकरण) (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिसूचना एनआरआई/ओसीआई निवेशकों के लिए पहले से मौजूद ऑनबोर्डिंग प्रणालियों का लाभ उठाकर विदेशी पोर्टफोलियो पूंजी के अधिक सक्रिय जुटाव को सुगम बनाएगी। सरकार ने कहा है कि कुल मिलाकर, इन सुधारों का मकसद परिचालन में दिक्कत को कम करना, बाजार में प्रवेश को आसान बनाना और बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की तरह देश में भी एक अधिक आसान निवेश का अवसर और अनुभव बेहतर बनाना है। इन उपायों से भारतीय शेयर बाजार और सरकारी प्रतिभूति बाजारों के लिए निवेशकों का आधार विस्तृत करने और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में निवेश करने के वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

