​डबरा को थैलेसीमिया मुक्त बनाने की मुहिम: 7 जून को संत कंवर राम स्कूल में लगेगा शिविर

ग्वालियर:सिंधु रॉयल संस्था द्वारा आने वाली पीढ़ी को एक गंभीर और जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए सराहनीय कदम उठाया जा रहा है। आगामी 7 जून को डबरा शहर के प्रतिष्ठित संत कंवर राम स्कूल में एक वृहद थैलेसीमिया जन-जागरूकता एवं जाँच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शहर के ख्यातिलब्ध चिकित्सक डॉ. कमल कटारिया ने मीडिया से विस्तार से चर्चा की। प्रेस वार्ता के दौरान विशेष रूप से संस्था के संरक्षक रमेश रोहिरा, घनश्याम हवलानी, संजय जीवतानी , राजकुमार राजू कुकरेजा, डॉ संजय अमुलानी, दिलीप आहूजा, राजेश रोहिरा, महेश हवलानी मौजूद रहे।
​क्या है थैलेसीमिया और क्यों जरूरी है जाँच?
​प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. कमल कटारिया ने बताया कि थैलेसीमिया एक बेहद गंभीर और आनुवंशिक बीमारी है। यदि यह बीमारी किसी बच्चे को हो जाए, तो वह जीवनभर मौत की शैया पर रहने को मजबूर हो जाता है, क्योंकि इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के शरीर में खून नहीं बनता, जिसके कारण उन्हें जीवनभर हर 15 से 20 दिनों में बाहर से खून चढ़ाना पड़ता है।

​डॉ. कमल कटारिया के अनुसार: “इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम केवल और केवल जागरूकता और सही समय पर की गई जाँच से ही संभव है। यदि कोई व्यक्ति थैलेसीमिया ‘माइनर’ है, तो उसे सामान्य तौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती। लेकिन, यदि दो थैलेसीमिया माइनर आपस में शादी कर लेते हैं, तो उनके होने वाले बच्चे को थैलेसीमिया ‘मेजर’ होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इस जाँच के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि दो थैलेसीमिया माइनर की शादी आपस में न हो, जिससे आने वाली पीढ़ी को इस दर्दनाक बीमारी से बचाया जा सके।”​​डॉ. कटारिया ने बताया कि इस शिविर में देश की प्रतिष्ठित थायरोकेयर लैब के माध्यम से रक्त के नमूने लिए जाएंगे।

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