
भोपाल। राजधानी भोपाल में गुरुवार को हुई करीब एक घंटे की तेज बारिश और आंधी ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी. बारिश से पहले नगर निगम द्वारा नालों की सफाई और बिजली कंपनी द्वारा व्यापक मेंटेनेंस के दावे किए जा रहे थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में कई व्यवस्थाएं चरमरा गईं. शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ और जगह-जगह पेड़ों की टहनियां टूटकर गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो गए.
300 फीडर बंद, अंधेरे में डूबा शहर
बारिश और तेज हवा के चलते राजधानी के करीब 300 बिजली फीडर प्रभावित हो गए. इसके कारण गोविंदपुरा, अशोका गार्डन, बीएचईएल, एमपी नगर, न्यू मार्केट समेत शहर के अधिकांश इलाकों में बिजली गुल हो गई. कई क्षेत्रों में करीब एक घंटे तक अंधेरा छाया रहा. बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए हाल के वर्षों में लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. इसके तहत केबलिंग और नए ट्रांसफार्मर लगाए गए, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्था की कमजोरियां उजागर हो गईं.
पेड़ों की टहनियां टूटने से कई मार्ग बाधित
नगर निगम की उद्यानिकी शाखा द्वारा बारिश से पहले पेड़ों की छंटाई का कार्य किया गया था, लेकिन तेज आंधी में शहरभर में करीब 200 स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं. इससे प्रोफेसर कॉलोनी, पॉलीटेक्निक चौराहा, लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, कोलार रोड, अवधपुरी और तुलसी नगर सहित कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ और जाम जैसी स्थिति बन गई.
नालों की सफाई के दावों पर भी उठे सवाल
हर वर्ष की तरह इस बार भी नगर निगम ने बारिश पूर्व नालों की सफाई अभियान चलाने का दावा किया था. इसके बावजूद पहली ही बारिश में कई निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई. भोपाल टॉकीज, अशोका गार्डन, प्रेस कॉम्प्लेक्स और अन्य संवेदनशील इलाकों में पानी भरने की शिकायतें सामने आईं. इससे निगम की तैयारियों और सफाई अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
पहली ही तेज बारिश ने यह संकेत दे दिया है कि मानसून के दौरान शहर की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को अभी और गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है.
