नयी दिल्ली, 04 जून (वार्ता) भारत के अहमदाबाद, नागपुर और मदुरै दुनिया के उन 10 शहरों में शामिल हैं जो अत्यधिक गर्मी के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
यह जानकारी पत्रिका ‘सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटी’ में प्रकाशित एक नये अध्ययन में सामने आयी है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले दुनिया के 205 शहरों का विश्लेषण कर यह आकलन किया कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण किन शहरों में लोगों पर सबसे अधिक जोखिम है। अध्ययन में केवल तापमान और आर्द्रता ही नहीं, बल्कि आबादी की आयु संरचना, एयर कंडीशनिंग की उपलब्धता, वृक्ष आवरण, बिजली की कीमतें और गरीबी जैसे कारकों को भी शामिल किया गया।
विश्लेषण में पाया गया कि सबसे अधिक जोखिम वाले 95 प्रतिशत से ज्यादा शहर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उप-सहारा अफ्रीका में स्थित हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया और घाना में उच्च जोखिम वाले शहरों की संख्या सबसे अधिक है। शीर्ष 10 सूची में भारत के सर्वाधिक शहर शामिल हैं।
अध्ययन के मुताबिक इराक का अल बसरा शहर अत्यधिक गर्मी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील पाया गया, जबकि भारत का अहमदाबाद दूसरे स्थान पर रहा। शीर्ष 10 में अन्य शहरों में बमाको (माली), नागपुर (भारत), क्वेज़ोन सिटी (फिलीपींस), बगदाद (इराक), मदुरै (भारत), फैसलाबाद (पाकिस्तान), लागोस (नाइजीरिया) और हैदराबाद (पाकिस्तान) शामिल हैं।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि अहमदाबाद और पाकिस्तान के कराची जैसे शहर गर्मी से बचाव के लिए कई उपाय लागू कर रहे हैं, लेकिन जलवायु अनुकूलन और शहरी ताप सहनशीलता के क्षेत्र में अभी भी पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता नेथमी जयरत्ने करियावासम ने कहा, “जोखिम केवल ऊंचे तापमान के संपर्क में आने से नहीं बनता, बल्कि उससे निपटने की क्षमता और संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण होती है।” सह-लेखक और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर राधिका खोसला ने कहा कि गर्मी से जुड़े जोखिमों की योजना बनाते समय केवल तापमान नहीं, बल्कि लोगों की संवेदनशीलता और उससे निपटने की क्षमता को भी ध्यान में रखना होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि एयर कंडीशनिंग पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा खपत बढ़ाकर वैश्विक तापवृद्धि को और तेज कर सकती है। उन्होंने कहा, “सभी लोगों के लिए सुरक्षित और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए निष्क्रिय शीतलन उपायों तथा पंखों और कूलरों जैसी कम ऊर्जा खपत वाली तकनीकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
