इंदौर: शहर के पूर्वी रिंग रोड की बेशकीमती जमीन को लेकर आईडीए सुप्रीम कोर्ट में उलझा हुआ है. उक्त जमीन की वर्तमान कीमत 6 सौ करोड़ बताई जा रही है. यह बात अलग है कि आईडीए ने सुप्रीम कोर्ट में अन्य पांच और मामले में किमती जमीनों को लेकर याचिका दायर कर रखी है.दरअसल आईडीए के सीईओ सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी पिछले कुछ दिनों से लगातार सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका को लेकर बहुत व्यस्त है. सभी अधिकारी पिछले दो तीन हफ्तों से संपदा, भू अर्जन और विधि विभाग के अधिकारी दिल्ली में डेरा डाले रहे.
इसका कारण है पूर्वी रिंग रोड पर योजना 94 में स्थित 3 एकड़ जमीन का मामला है, जिसमे आईडीए हाईकोर्ट से हार चुका है. हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ आईडीए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका रुचि सोया ग्रुप के महादेव शाहरा और आईडीए के बीच वर्ल्ड कप चौराहे पर स्थित 3 एकड़ यानि 1 लाख 35 वर्ग फुट जमीन है. उक्त जमीन आईडीए से महादेव शाहरा ने शिक्षण संस्थान के लिए ली थी. इस बात की बीस साल बिग चुके हैं. आईडीए सूत्रों के अनुसार उक्त जमीन इस शर्त पर आवंटित की गई थी कि प्रदेश शासन से अनुमति मिलने पर हैंड ओवर कर की जाएगी. तत्समय आईडीए ने 32 करोड़ में जमीन आवंटित की थी, लेकिन शासन अनुमति की शर्त प्रभावी थी, जो आज भी लागू है. मगर आज आईडीए की उक्त 3 एकड़ जमीन की वर्तमान कीमत करीब 6 सौ करोड़ रुपए बताई जा रही है.
प्रदेश शासन ने अनुमति जारी नहीं की
मामला कोर्ट में इसलिए पहुंचा कि उक्त जमीन की अनुमति प्रदेश शासन ने आज तक जारी ही नहीं की है. दूसरी ओर आवंटिती ने कोर्ट में अनुमति को लेकर दायर याचिका में तर्क दिया कि आईडीए और शासन के बीच का मामला है और आईडीए शासन से अनुमति लेकर दे. आईडीए ने शर्त का हवाला दिया है कि प्लॉट देते समय ही यह स्पष्ट था कि प्रदेश शासन से अनुमति मिलने पर ही जमीन का कब्जा मिलेगा.
चूंकि प्रदेश शासन ने अनुमति नहीं तो जमीन आज भी आईडीए की है. आईडीए ही उसका असली मालिक है. उक्त तर्कों को लेकर पिछले 15 से 20 दिनों ने सीईओ, संपदा, भू अर्जन और विधि विभाग के अधिकारी दिल्ली – इंदौर एक किए हुए है. आईडीए पूरी ताकत के साथ दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती पेश कर 6 सौ करोड़ की जमीन को लेकर गंभीरता से लड़ाई लड़ रहा है. यह बात और है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आईडीए के पक्ष में आता है या खिलाफ?
