वॉशिंगटन | अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। निचले सदन ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों को सीमित कर दिया है। 215-208 के करीबी अंतर से पारित इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बिना संसदीय मंजूरी के ईरान के विरुद्ध किसी भी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप को रोकना है।
रिपब्लिकन खेमे में दिखी फूट
यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के लिए विशेष चुनौती है क्योंकि उनकी अपनी पार्टी के कई सांसदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर डेमोक्रेट्स का समर्थन किया है। थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन जैसे रिपब्लिकन सांसदों के इस कदम ने प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है। सदन के स्पीकर माइक जॉनसन द्वारा इस प्रस्ताव को रोकने की तमाम कोशिशें विफल रहीं, जिससे व्हाइट हाउस और संसद के बीच जारी टकराव और गहरा हो गया है।
संवैधानिक जिम्मेदारियों पर जोर
विपक्ष का कहना है कि यह कदम संवैधानिक ‘चेक एंड बैलेंस’ को बहाल करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के पास वीटो का अधिकार है, जिससे वे इस विधेयक को रोक सकते हैं, लेकिन इस वोटिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन की नीतियों को लेकर विधायिका में भारी असंतोष है। इस घटनाक्रम ने न केवल विदेश नीति पर बहस छेड़ दी है, बल्कि आगामी राजनीतिक निर्णयों को भी प्रभावित करने के संकेत दिए हैं।

