
पठारी, कलेक्टर अंशुल गुप्ता की पहल पर स्थानीय स्तर पर गोबर से दीपक निर्माण का कार्य अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नई दिशा तय कर रहा है. महिलाओं के स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों द्वारा बनाए जा रहे ये पर्यावरण हितैषी दीपक न केवल बाजार की मांग पूरी कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं.
ग्राम पंचायत बरखेड़ा की श्री कृष्णा गौशाला समिति के द्वारा गोबर से दीपक बनाने का कार्य शुरू किया गया है. दीपक बनाने के गोबर को सुखा कर उसमें काली मिट्टी वाला पानी और इमली के बीज का पाउडर मिला कर मटेरियल को सांचे में डाल के दीपक को बनाया जाता है. सूखने के बाद उस पर कलर कर दीपक तैयार हो जाता है. बरखेड़ा की श्री
कृष्णा गौशाला समिति के अध्यक्ष राज कुमार यादव ने एक वर्ष में 20 लाख दीपक बनाने का लक्ष्य रखा है. गोबर के दीपक न केवल पर्यावरण हितैषी हैं, बल्कि यह पारंपरिक संस्कृति को भी जीवित रखते हैं. दीपावली पर्व को देखते हुए इन दीपकों की मांग तेजी से बड़ी है. ग्रामीण महिलाओं के लिए यह पहल एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में सामने आई है. इसमें गोबर मिट्टी
का है, इसलिए ये दीपक न पानी में घुलेंगे और न आग से जलेंगे, मिट्टी के दीपकों की तुलना में ये तेल भी कम सोखते हैं. दीपावली पर जब घर-घर ये दीपक जलेंगे, तब यह परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम होगा. आने वाले समय में इन दीपकों की मांग केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहकर अन्य जिलों और राज्यों तक पहुंचने की संभावना है.
