कलेक्टर न्यायालय का बड़ा फैसला

ग्वालियर: कलेक्टर न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राम सातऊ स्थित लगभग 24 बीघा (4.996 हेक्टेयर) बेशकीमती जमीन को फिर से सरकारी घोषित कर दिया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के न्यायालय द्वारा संबंधित तहसीलदार को भूमि को वापस शासन के खाते में दर्ज करने और उसे अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश जारी किए गए हैं। इस भूमि के संबंध में पूर्व में अनुविभागीय राजस्व अधिकारी द्वारा पारित आदेश को भी कलेक्टर न्यायालय द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत निरस्त कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर न्यायालय द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) लश्कर से इसकी विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि ग्राम सातऊ की सर्वे क्रमांक 168/2/2 की यह भूमि पुरानी मिसिल बंदोबस्त संवत् 1997 से लेकर संवत् 2019 तक के सरकारी रिकॉर्ड में ‘पड़ती कदीम’ (पुरानी बंजर/शासकीय भूमि) के रूप में दर्ज थी। इसके बाद, संवत् 2020 से 2024 के दौरान बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश या वैध दस्तावेज के, इस भूमि पर किशनलाल पुत्र काशीराम गुर्जर का नाम राजस्व रिकॉर्ड में गलत तरीके से अंकित कर दिया गया।
एसडीओ लश्कर द्वारा की गई स्थलीय जांच में पाया गया कि यह जमीन मुख्य हाईवे से जुड़ी हुई है। वर्तमान में इस खाली भूमि पर दो तरफ अस्थाई सीमेंट की बाउंड्रीवॉल बनी हुई है और संबंधित पक्ष द्वारा इस पर कृषि कार्य कर कब्जा किया गया है।
कलेक्टर न्यायालय ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज संबंधित हितबद्ध पक्षकारों को अपना पक्ष रखने के लिए समन जारी कर तलब किया था। सुनवाई के दौरान जब खतौनी की जांच की गई, तो उसमें इस भूमि का कोई वैध खाता दर्ज नहीं मिला। संबंधित पक्षकार भी भूमि पर अपने मालिकाना हक (स्वत्व) से जुड़ा कोई भी कानूनी दस्तावेज या आदेश प्रस्तुत नहीं कर सके। विधिवत सुनवाई के बाद कलेक्टर न्यायालय ने इस भूमि को उसके मूल स्वरूप यानी ‘शासकीय’ घोषित करने का आदेश पारित किया है।
15 दिन में कब्जा हटाने के निर्देश
संबंधित तहसीलदार को आदेशित किया गया है कि वे राजस्व रिकॉर्ड में इस सुधार को अमल में लाएं, अर्थात जमीन को शासन के नाम दर्ज करें। साथ ही मौके पर काबिज कृषक से अगले 15 दिनों के भीतर भूमि का कब्जा वापस लेकर, सरकारी ‘कब्जा रसीद’ कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत करें।

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