17 वर्षीय छात्र के खुलासों से घिरा CBSE का OSM टेंडर, संसदीय समिति के सामने रखे 15 कथित विसंगतियों के दस्तावेज

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़े टेंडर को लेकर एक 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत द्वारा उठाए गए सवाल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। संसदीय शिक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत अपने विश्लेषण में छात्र ने दावा किया कि उसने किसी गोपनीय दस्तावेज या लीक हुई जानकारी के बजाय सरकारी खरीद पोर्टल पर उपलब्ध सार्वजनिक टेंडर दस्तावेजों का महीनों तक अध्ययन कर विभिन्न चरणों में किए गए बदलावों की पहचान की है। उसके अनुसार OSM परियोजना के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया के तीन चरणों में पात्रता और तकनीकी शर्तों में कई संशोधन किए गए, जिनसे एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचने की आशंका पैदा होती है।

सार्थक ने आरोप लगाया कि टेंडर के अलग-अलग संस्करणों की लाइन-दर-लाइन तुलना करने पर करीब 15 विसंगतियां सामने आईं। इनमें खराब प्रदर्शन करने वाले सेवा प्रदाताओं को अयोग्य घोषित करने वाली शर्त का हटाया जाना, ब्लैकलिस्टिंग संबंधी नियमों में बदलाव, वित्तीय पात्रता मानकों को संशोधित करना, CMMI जैसी तकनीकी योग्यता से जुड़ी आवश्यकताओं में परिवर्तन तथा परियोजना अनुभव संबंधी पात्रता शर्तों में संशोधन शामिल हैं। उसका कहना है कि पहले दो चरणों में टेंडर सफल नहीं हुए, जबकि तीसरे चरण में शर्तों में बदलाव के बाद चयनित कंपनी को ठेका प्रदान किया गया।

छात्र ने मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तकनीकी संचालन और टेंडर प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उसके दावों के बाद मामला संसदीय स्तर तक पहुंच गया और समिति ने उसकी प्रस्तुति को आज गंभीरता से सुना। जिसकी अध्यक्षता दिग्विजय सिंह कर रहे थे। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। राहुल गांधी ने भी सार्थक से मुलाकात कर उसके प्रयासों की सराहना की।

हालांकि, फिलहाल ये सभी आरोप जांच और समीक्षा के दायरे में हैं। CBSE ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि वास्तविक मूल्यांकन पोर्टल के हैक होने संबंधी दावे सही नहीं हैं तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे परीक्षण वेबसाइट से जुड़े थे, न कि मूल मूल्यांकन प्रणाली से। ऐसे में पूरे मामले की सत्यता जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

 

 

 

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