पटवारी, सिंघार, यादव को हर हाल सीट निकालने का जिम्मा

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

आशंका-कुशंका के बीच इस राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस की साख दांव पर लगी हुई है. विधायकों के वोट समीकरण के हिसाब से 3 में से एक सीट कांग्रेस को स्पष्ट तौर पर जाती दिख रही है. उसे सीट निकालने के लिए 58 वोट की जरूरत है और उसके पास 64 विधायक है. इसमें से एक विधायक के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने मताधिकार पर अंतिम निराकरण तक रोक लगा रखी है. न्यायालय से 3 साल की सजा होने से एक की विधायकी समाप्त हो चुकी है. एक पर दलबदल मामला विचाराधीन चलते स्थिति डांवाडोल है. ऐसे में क्रास वोटिंग का डर समाए कांग्रेस के लिए सीट निकालना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. वह बीते समय उड़ीसा, हरियाणा, बिहार में क्रास वोटिंग का दंश झेल चुकि है. उसे आशंका है कि भाजपा तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतार जोड़-तोड़ कर उसका खेल बिगाडऩे की कोशिश कर सकती है. तीसरी सीट के लिए भाजपा के पास 48 वोट बच रहे होंगे. वह अतिरिक्त 10 वोट पाने कांग्रेस विधयकों में सेंध लगा सकती है. इसीलिए पार्टी हाईकमान ने जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, अरुण यादव को दिल्ली बुलाकर पार्टी विधायकों में एकजुटता बनाए रखने का जिम्मा सौंप दिया है. उन्हें कह दिया गया कि टिकट किसी को भी मिले, राज्य सभा की यह सीट किसी भी हालत में खोना नहीं चाहिए. सभी विधायकों से सतत संपर्क और गतिविधियों पर नजर रखें. साथ ही शत-प्रतिशत कांग्रेस विधायकों का पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान हो.
आदिवासियों को अपना़ बनाए रखने की जुगत
काग्रेस को क्रास वोटिंग का खुटका जयस से जुड़े कांग्रेसी विधायकों से है. उनकी समान नागरिकता से परे रखने की बात विगत दिनों केन्द्र की भाजपा लरकार ने मान ली है. इसके बाद से जयस से जुड़े इन नेताओं का भाजपा के प्रति रवैया नरम दिखाई दे रहा है. इसी कारण विशेष सतर्कता बरतते हुए आदिवासिी वर्ग को अपने से जोड़े रखने के लिए कांग्रेस एक नरेटिव गढऩे में लगी है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, अरुण यादव, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने भाजपा के आदिवासियों को वनवासी कहे जाने को मुद्दा बना लिया है और उसे भाजपा की आदिवासियों के खिलाफ मंशा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. वह नरेटिव गड़ रही है कि आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को भाजपा बदलने पर तुली है. आदिवासियों को वनवासी कहकर उनकी पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. इस नरेटिव से आदिवासी कितने प्रभावित होते हैं, समय बताएगा.
क्या तीसरी सीट पर विजयवर्गीय को उतारेगी भाजपा?
राज्य सभा की 3 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. 8 जून तक नामांकन दाखिल होना है. 2-3 दिन में भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा कर देगी. सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश भाजपा ने संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है. चर्चा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम दावेदारों में प्रमुखता से शामिल है माना जा रहा है कि राज्यसभा के जरिए उनकी राष्ट्रीय राजनीति में वापसी हो सकती है. लेकिन विजयवर्गीय की मंशा इसके लिए खुलकर सामने नहीं आई है. उनके अस्पष्टता के रुख की वजह यह भी बताई जाती है कि उन्होंने प्रत्याशी के तौर पर अपने खास राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती का नाम आगे बढ़ाया है. खैर निर्णय दिल्ली के हाथ है. वैसे यह भी बताया जा रहा है कि अगर जीत की संभावना नजर आती है तो कांग्रेस को जाती दिख रही तीसरी सीट पर कैलाश विजयवर्गीय को उतारा जा सकता है, क्योंकि उनका रणनीतिक कौशल परिस्थिति और पासा पलटने में माहिर है. देखते हैं दिल्ली भाजपा नेतृत्व क्या निर्णय लेता है.

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