महान कॉमेडियन महमूद अली की पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष भरे सफर की यादें फिर ताजा हो गई हैं। मूंगफली बेचने से लेकर दिग्गज हास्य अभिनेता बनने तक का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।
हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई। जब भी बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और सफल कॉमेडियन का जिक्र होता है, तो महमूद अली का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन बड़े पर्दे पर करोड़ों लोगों को हंसाने वाले इस कलाकार की अपनी जिंदगी चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों से भरी हुई थी। अपने शुरुआती दिनों में गुजारा करने के लिए महमूद ने न जाने कितने छोटे-मोटे काम किए।
आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर उनके इसी संघर्षशील और प्रेरणादायक सफर को याद किया जा रहा है। महमूद बचपन से ही फिल्मों के प्रति आकर्षित थे। उन्होंने बचपन में किस्मत जैसी बड़ी फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम कर लिया था। बॉलीवुड में जगह पाने से पहले उन्होंने जीवन चलाने के लिए कई तरह के काम किए। वे फेमस फिल्म डायरेक्टर पीएल संतोषी की गाड़ी तक चलाया करते थे। दिलचस्प बात यह रही कि आगे चलकर उसी डायरेक्टर के बेटे राजकुमार संतोषी ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म अंदाज अपना अपना में उन्हें कास्ट किया।
परिवार की जिम्मेदारियों ने बदला एक्टिंग का नजरिया
जब महमूद ने दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी की बहन मधु से शादी की और पिता बने, तो परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां काफी बढ़ गईं। घर चलाने और बेहतर जिंदगी देने के लिए महमूद ने गंभीरता से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।
उन्होंने सीआईडी फिल्म में एक छोटे से हत्यारे के रोल से शुरुआत की। इसके बाद दो बीघा जमीन और प्यासा जैसी कालजयी फिल्मों में उन्होंने मूंगफली बेचने वाले जैसे बेहद मामूली किरदार निभाए। इन्हीं छोटे-छोटे किरदारों में उनके काम को पहचाना गया और धीरे-धीरे उन्हें बड़े रोल मिलने लगे।
हैदराबादी लहजे से जीता दर्शकों का दिल
महमूद की कॉमेडी की सबसे खास बात उनका हैदराबादी उर्दू लहजा था, जिसे दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया। उन्होंने 4 दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अपनी एक्टिंग का जादू बिखेरा। उनकी शानदार एक्टिंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें फिल्मफेयर में 25 बार नामांकित किया गया।
उस समय हास्य श्रेणी में पुरस्कार बाद में शुरू हुए थे, फिर भी उन्होंने कई बार यह ट्रॉफी अपने नाम की। अपनी पॉपुलेरिटी के चरम पर वे हिंदी फिल्मों में मुख्य अभिनेताओं से भी ज्यादा फीस लिया करते थे।
अमेरिका की वो खामोश रात और आखिरी अलविदा
80 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री में नए कॉमेडियन आए, तो महमूद की फिल्मों की संख्या कम होती चली गई। अंदाज अपना अपना में उनका जॉनी का किरदार एक्टर के तौर पर उनकी आखिरी सबसे चर्चित और हिट भूमिका साबित हुई।
जीवन के आखिरी सालों में वे लगातार दिल की बीमारियों से जूझ रहे थे। बेहतर इलाज की उम्मीद में वे अमेरिका गए हुए थे। 23 जुलाई 2004 को पेंसिल्वेनिया में नींद के दौरान ही इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। मुंबई के महबूब स्टूडियो में उनके फैंस ने अपने चहेते कलाकार को अंतिम श्रद्धांजलि दी थी।
जब भी बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन कॉमिक किरदारों की बात होगी, फिल्म पड़ोसन के मास्टर पिल्लई का जिक्र सबसे पहले आएगा। साल 1968 में आई इस फिल्म में महमूद ने साउथ इंडियन संगीत मास्टर का ऐसा जीवंत अभिनय किया कि लोग आज भी उनके दीवाने हैं।
फिल्म में सुनील दत्त के साथ उनका संगीत मुकाबला आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित और मजेदार दृश्यों में से एक माना जाता है। सायरा बानो और किशोर कुमार की मौजूदगी के बावजूद महमूद अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल रहे थे।
