ट्विशा शर्मा मौत मामला: डमी बॉडी से रीक्रिएशन और गर्भपात की सलाह देने वाले डॉक्टर को समन, FIR के बाद भी 3 दिन भोपाल में ही छुपा था समर्थ

भोपाल: ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की जांच कर रही सीबीआई ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। इसी कड़ी में रविवार को जांच एजेंसी ने पूर्व जज गिरी बाला सिंह के निवास पर डमी बॉडी की मदद से घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन किया। अधिकारियों ने घटनाक्रम को दोबारा समझने और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करने के उद्देश्य से पूरे घटनास्थल का सूक्ष्म परीक्षण किया।

जांच के समानांतर सीबीआई ने उस चिकित्सक को भी समन जारी किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) की सलाह दी थी। एजेंसी यह जानना चाहती है कि ट्विशा की गर्भावस्था, गर्भपात और उसके बाद की परिस्थितियों के संबंध में जो दावे सामने आए हैं, उनकी वास्तविकता क्या है और इन घटनाओं का उसके मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर से यह जानकारी जुटाई जाएगी कि ट्विशा पहली बार कब उनके संपर्क में आई, उसे किस आधार पर चिकित्सकीय सलाह दी गई और गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान क्या परिस्थितियां थीं। सीबीआई इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण मान रही है क्योंकि मुख्य आरोपी समर्थ सिंह लगातार यह दावा करता रहा है कि गर्भपात के बाद ट्विशा अवसादग्रस्त हो गई थी और इसी कारण उसने आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि अब तक वह इस दावे के समर्थन में कोई ठोस कारण या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया है।
उधर, जांच में समर्थ सिंह की फरारी से जुड़े नए तथ्य भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद वह तत्काल शहर से बाहर नहीं गया था, बल्कि लगभग तीन दिन तक भोपाल में ही रहा। इसके बाद उसने जबलपुर में करीब पांच दिन तक ठिकाना बनाया। सीबीआई अब उसके मूवमेंट, मोबाइल लोकेशन, संपर्कों और उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने कथित रूप से फरारी के दौरान उसकी मदद की हो सकती है। यदि ऐसे व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच एजेंसी ट्विशा की मौत के बाद के घटनाक्रम को भी बारीकी से खंगाल रही है। सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सबसे पहले ट्विशा को किस हालत में देखा गया, उसे फंदे से किसने उतारा, उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल ले जाने तक घटनाओं का क्रम क्या रहा। इन बयानों का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी तथ्यों से मिलान कर एक सटीक टाइमलाइन तैयार की जा रही है।
गौरतलब है कि यह मामला शुरू से ही आत्महत्या और हत्या की आशंकाओं के बीच उलझा हुआ है। एक ओर आरोपी इसे आत्महत्या का मामला बता रहा है, वहीं दूसरी ओर सीबीआई दोनों के संबंधों, कथित विवादों, मारपीट, सबूतों से संभावित छेड़छाड़ और घटनास्थल से मिले विभिन्न साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि मौत से पहले वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं और घटनाक्रम किस दिशा में विकसित हुआ।

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