इंदौर में भूजल संवर्धन और वर्षा जल संचयन की बड़ी पहल

इंदौर: शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए इंदौर नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है. यह परियोजना आईआईटी रुड़की के तकनीकी मार्गदर्शन तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के सहयोग से क्रियान्वित की जाएगी. परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करते हुए शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर को सुदृढ़ करना और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है.

इस पहल के तहत इंदौर को उन 75 शहरों में शामिल किया गया है, जिन्हें एनआईयूए द्वारा देशभर में चयनित किया गया है. मध्यप्रदेश से इंदौर के साथ देवास और उज्जैन भी इस योजना में शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना शहरी जल प्रबंधन की दिशा में एक मॉडल साबित हो सकती है. आईआईटी रुड़की द्वारा शहर की वर्षा पद्धति, भूगर्भीय संरचना, जलभराव की स्थिति और भूजल स्तर का विस्तृत अध्ययन किया गया. इसके बाद 20 संभावित स्थलों का निरीक्षण किया गया और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर प्रथम चरण में 10 स्थानों का चयन किया गया.

इनमें नेहरू स्टेडियम, लेबर कमिश्नर कार्यालय परिसर, गांधी हॉल स्थित सूखा बोरवेल, वाघमारे का बगीचा, रीजनल पार्क, रेवती हिल्स, निपानिया क्षेत्र, वल्लभनगर बावड़ी, सिद्धेश्वर मंदिर परिसर और पीएससी ऑफिस के सामने मैदान शामिल हैं. इन सभी स्थानों पर वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से वर्षा जल को संग्रहित कर उसे फिल्टर सिस्टम से शुद्ध करते हुए शैलो एम्फिर तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा सके. इसके लिए कलेक्शन टैंक, फिल्टर चैंबर, रिचार्ज शाफ्ट, डायवर्जन चैनल और आधुनिक फिल्टर मीडिया जैसे रेत, एग्रीगेट एवं एक्टिवेटेड कार्बन का उपयोग किया जाएगा. साथ ही पुरानी बावड़ियों और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.

नेहरू स्टेडियम होगी मॉडल साइट
परियोजना के अंतर्गत नेहरू स्टेडियम को मॉडल साइट के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लगभग 5315 वर्गमीटर क्षेत्र से वर्षा जल संग्रहित कर प्रतिदिन लगभग 51 घन मीटर पानी भूजल में रिचार्ज किया जाएगा. यह व्यवस्था वर्षा ऋतु के दौरान बड़ी मात्रा में जल संरक्षण सुनिश्चित करेगी.

टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की
इस परियोजना से भूजल स्तर में सुधार, जल संकट में कमी, वर्षा जल का अधिकतम उपयोग, जलभराव की समस्या से राहत और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है. साथ ही यह पहल शहर में जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होगी. नगर निगम के अनुसार इस कार्य के लिए लगभग 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है और ड्रेनेज विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा

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