सिद्धार्थ सुरेका,मुख्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता अधिकारी,मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज
1. जब आपने अपने रिसर्च और निवेशक प्लेटफॉर्म मेंAI को जोड़ना शुरू किया,तब सबसे बड़ी समस्या क्या थी जिसे आप हल करना चाहते थे?हमारी रिसर्च टीम हमेशा से गहराई वाले30 पेज के डिटेल्ड रिपोर्ट बनाती रही है,जो बड़े संस्थागत निवेशकों के स्तर की क्वालिटी रखते हैं। लेकिन हमारा सवाल यह था कि यही मजबूत रिसर्च आम रिटेल निवेशकों तक आसान तरीके से कैसे पहुंचाई जाए,ताकि वे भी सही और समझदारी से निवेश का फैसला ले सकें।हमने देखा कि रिटेल निवेशक जानकारी तो चाहते हैं,लेकिन आसान और दिलचस्प तरीके में।AI ने इसी समस्या का समाधान किया। अब वही गहरी रिसर्च लोगों तक ऐसे तरीके से पहुंच रही है,जिसे वे आसानी से समझ सकें और उससे जुड़ सकें।_____2. आज निवेशक लंबे रिपोर्ट पढ़ने के बजाय तुरंत और बातचीत जैसे अनुभव चाहते हैं। ऐसे में आप रिसर्च को कैसे बदल रहे हैं?पहले निवेशकों को पूरी रिपोर्ट पढ़कर जरूरी जानकारी निकालनी पड़ती थी। अब हमने उस अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है।अब निवेशक सीधे सवाल पूछ सकते हैं — जैसे किसी शेयर का लक्ष्य क्या है या कंपनी को लेकर हमारी राय क्या है — और उन्हें तुरंत जवाब मिल जाता है।हमने अपने रिसर्च,एक्सपर्ट्स की राय, तकनीकी संकेत और बाजार के ताजा आंकड़ों को एक ही बातचीत वाले प्लेटफॉर्म में जोड़ दिया है। रिसर्च वही है,लेकिन उसे इस्तेमाल करने का तरीका अब ज्यादा आसान और तेज हो गया है।____3. 350 से ज्यादा कंपनियों की कवरेज के बीचAI का सबसे बड़ा असर कहाँ दिख रहा है — रफ्तार,सटीकता या पहुंच?AI ने सिर्फ काम की रफ्तार नहीं बढ़ाई,बल्कि रिसर्च को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। सबसे बड़ा बदलाव भाषा के स्तर पर आया है।अब कोई निवेशक हिंदी और अंग्रेजी मिलाकर भी सवाल पूछ सकता है और उसे वही जानकारी मिलती है,जो पहले सिर्फ अंग्रेजी रिपोर्ट्स में होती थी।रफ्तार और सटीकता जरूरी हैं,लेकिन देशभर के निवेशकों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंच बनानाAI की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है।____4. AI के जरिए रिसर्च को आसान बनाते समय उसकी गहराई और भरोसे को कैसे बनाए रखते हैं?हमारी पूरीAI व्यवस्था मजबूत और संस्थागत स्तर की रिसर्च पर आधारित है।AI सिर्फ जानकारी देने का तरीका बदलता है,रिसर्च की गुणवत्ता नहीं।इसे ऐसे समझिए जैसे पूरी किताब पढ़ने की बजाय सीधे लेखक से सवाल पूछ लेना। जानकारी वही रहती है,लेकिन समझना ज्यादा आसान हो जाता है।इसके अलावा,हमने गुणवत्ता और नियमों का ध्यान रखने के लिए मजबूत सिस्टम बनाए हैं। एक्सपर्ट्स की टीम लगातार जवाबों की जांच करती है,ताकि रिसर्च की विश्वसनीयता बनी रहे।____5. क्या AI आपके बिजनेस मॉडल को “रिसर्च देने” से “जानकारी आधारित सेवा” की तरफ ले जा रहा है?हम बिजनेस मॉडल नहीं बदल रहे,बल्कि रिसर्च को इस्तेमाल करने का तरीका बदल रहे हैं।निवेशकों के पास आज भी डिटेल्ड रिपोर्ट्स मौजूद हैं,लेकिन अब वे उसी रिसर्च को छोटे सार,बातचीत वाले फॉर्मेट और वीडियो रिपोर्ट्स के जरिए भी समझ सकते हैं।____6. AI टूल्स आने के बाद निवेशकों के व्यवहार में क्या बदलाव देखने को मिल रहे हैं?सबसे बड़ा बदलाव यह है कि निवेशकों की जिज्ञासा बढ़ी है। अब लोग शेयर बाजार,सेक्टर और कंपनियों को लेकर ज्यादा सवाल पूछ रहे हैं।जब निवेशकों को अपनी भाषा में बातचीत जैसा अनुभव मिलता है,तो वे रिसर्च से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। कई लोग बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौट रहे हैं और यह उनकी आदत बनती जा रही है।कोई सवाल पूछ रहा है,कोई वीडियो देख रहा है और कोई छोटे सार पढ़ रहा है। इससे निवेशकों को ज्यादा जानकारी के साथ बेहतर फैसले लेने में मदद मिल रही है।____7. AI के दौर में नए प्रयोग और नियमों के पालन के बीच संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?हम नियमों के पालन को रुकावट नहीं मानते,बल्कि शुरुआत से ही उसे सिस्टम का हिस्सा बनाते हैं।वित्तीय सेवाओं में जानकारी और निवेश सलाह के बीच साफ नियम होते हैं। इसलिए हमाराAI खुद से सलाह नहीं देता,बल्कि पहले से मौजूद रिसर्च को आसान तरीके से लोगों तक पहुंचाता है।हर जवाब हमारे विश्लेषकों की प्रकाशित रिसर्च पर आधारित होता है और हमने साफ सीमाएं तय की हैं किAI क्या कह सकता है और क्या नहीं। इसी वजह से हम तेजी से नए प्रयोग कर पाते हैं,बिना नियमों से समझौता किए।_____8. अगले 2–3 सालों में कौन-सी कंपनियां AI से सबसे ज्यादा फायदा उठा पाएंगी?जो कंपनियांAI का इस्तेमाल ग्राहकों की असली समस्याओं को हल करने के लिए करेंगी,वही आगे निकलेंगी।हमारे लिए सबसे जरूरी बात यह है कि क्या हम ग्राहकों तक जानकारी को तेज,आसान और बड़े स्तर पर पहुंचा पा रहे हैं।रफ्तार,ज्यादा पहुंच और सरल अनुभव — यही हमारी सोच है। जो कंपनियांAI को इसी नजरिए से अपनाएंगी,वही आने वाले समय में सबसे मजबूत बढ़त बनाएंगी।