उज्जैन: संभाग में धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति देने की तैयारी शुरू हो गई है. प्रदेश सरकार अब ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें धनाढ्य श्रद्धालुओं और निवेशकों की भागीदारी से मंदिरों का पुनरुद्धार और विस्तार किया जाएगा.इसी दिशा में जिला प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विस्तृत मंथन हुआ, जहां टेंपल बॉन्ड योजना को लेकर कानूनी और वित्तीय पहलुओं पर भी चर्चा की गई.
कमिश्नर कलेक्टर ने किया मंथन
संभागायुक्त आशीष सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में उज्जैन और आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई. कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और आगर-मालवा कलेक्टर प्रीति यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए.
11 प्रमुख मंदिरों का पुनरुद्धार
श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिरों के सुव्यवस्थित संचालन और सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों को ध्यान में रखते हुए 11 प्रमुख मंदिरों का पुनरुद्धार लगभग 1100 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा. इनमें काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनी आश्रम, गढ़कालिका मंदिर, सिद्धवट और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं.
200 करोड़ के टेंपल बांड जारी
योजना के अनुसार 200 करोड़ रुपए के टेंपल बॉन्ड जारी किए जाएंगे. प्रशासन का मानना है कि इससे मंदिर निर्माण और विस्तार कार्यों को तेज गति मिलेगी. श्रद्धालु निवेशकों को भविष्य में लाभ देने की व्यवस्था भी बनाई जा रही है, ताकि धार्मिक आस्था के साथ आर्थिक सहभागिता का नया मॉडल विकसित हो सके. इसके लिए कानूनी अभिमत भी लिया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से लागू हो सके.
धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा
माना जा रहा है कि इस योजना से मंदिरों में दर्शन व्यवस्था बेहतर होगी, आम श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी, भीड़ प्रबंधन मजबूत होगा और सिंहस्थ में आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं को आधुनिक व्यवस्थाओं का लाभ मिलेगा. मंदिरों के आसपास आधारभूत ढांचे का विस्तार होने से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है.
15 जुलाई तक समय
प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि 15 जुलाई तक बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए और जुलाई के अंतिम सप्ताह तक टेंपल बॉन्ड औपचारिक रूप से लॉन्च किए जा सकें.
