हद हो गई: लोन के लिए बेटे ने पिता को ही कागजों में मार डाला, इंदौर-खिलचीपुर का अजीबोगरीब मामला

राजगढ़: खिलचीपुर नगर में एक बेटे ने अपने पिता को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर फर्जी तरीके से संपत्ति अपने और मां के नाम कराई और बैंक से लोन ले लिया. आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि बैंक ने भी दस्तावेजों और परिवार का भौतिक परीक्षण किए बिना ही लोन भी दे दिया. मामले की शिकायत पुलिस को की गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है. संवेदनशील मामला होने से बैंक, सरकारी विभाग और पीड़ित के बेटे से पूछताछ की जा रही है. इधर,बेटे द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंक से 20 लाख रुपए का लोन भी ले लिया.
किसी और का मकान-दुकान अपने नाम कराया
पड़ताल में सामने आया कि आरोपी यश गुप्ता ने लोन लेने के लिए किसी और की संपत्ति को अपना बताया था. खिलचीपुर के वार्ड क्रमांक-7 में एक टेलर का मकान (भवन नंबर 15/1) और इंदौर निवासी एक व्यक्ति की दुकान (भवन नंबर 15) है. इस दुकान को यश के मामा राकेश ने सालों पहले किराए पर लिया था. यश ने नगर परिषद के फर्जी दस्तावेज, नकली सील और फर्जी साइन तैयार किए. इसके जरिए उसने इस मकान-दुकान को पहले पिता के नाम दिखाया, फिर पिता को मृत घोषित कर यह प्रॉपर्टी अपनी मां बबीता गुप्ता और अपने नाम ट्रांसफर करा ली लोन लेते वक्त उसने फाइल में मामा की दुकान की तस्वीर लगाई, जबकि भवन नंबर टेलर के मकान का डाल दिया और 20 लाख रुपए का लोन पास करा लिया चूंकि यश पहले भी एक लोन ले चुका था, इसलिए उसे पूरी बैंकिंग प्रोसेस पता थी.
एयू स्माइल फायनेंस बैंक ने दिया 20 लाख का लोन
31 अगस्त 2024 को यश ने खुद को खिलचीपुर का निवासी बताकर अपनी मां और अपने नाम पर यह लोन पास कराया था. लोन की अवधि और यह लोन 15 साल के लिए लिया गया था, जिसकी मासिक किस्त 26,635 रुपए है. बैंक अधिकारियों के मुताबिक, कुल 21 किस्तों में से यश ने केवल 14 किस्तें ही जमा की हैं. पिछले काफी समय से 6 किस्तें पेंडिंग हैं, जिसके चलते बैंक ने उसके अकाउंट को डिफॉल्टर श्रेणी में डाल दिया है.
जब किस्तें चुकाने में दिक्कत आई तो युवक ने खुद को भी कागजों में मृत दिखाने की कोशिश की. मामले का खुलासा तब हुआ, जब पिता दिनेश गुप्ता को एक परिचित से बेटे के बैंक लोन की जानकारी मिली. शक होने पर वे बैंक पहुंचे, जहां रिकॉर्ड में खुद को स्वर्गीय देखकर हैरान रह गए, बैंक में जमा दस्तावेजों में उन्हें मृत दर्शाते हुए संपत्ति का नामांतरण मां और बेटे के नाम दिखाया गया था.
लोगों के अकाउंटस मेंटेन करते हैं दिनेश गुप्ता
कहानी के पीड़ित दिनेश गुप्ता खिलचीपुर में प्रतिष्ठित लोगों के
अकाउंट्स मेंटेन करने का काम करते हैं. उन्होंने रुंधे गले से अपनी आपबीती सुनाई. दिनेश ने कहा-34 साल पहले बबीता से शादी हुई. दो बेटे यश और पवन हुए. बच्चों को अच्छी शिक्षा दी, लेकिन वे गलत रास्ते पर चल पड़े. घर में रोज विवाद होने लगा, यहां तक कि पत्नी भी बच्चों का ही पक्ष लेती थी. रोज के क्लेश से तंग आकर मैंने 2020 में अपना घर छोड़ दिया और एक किराए के कमरे में रहने लगा. साल 2023 में यश ने बेकरी व्यवसाय खोलने के नाम पर बैंक ऑफ इण्डिया से 5 लाख का लोन लिया था. लोन लेने के बाद उसने केवल 1 लाख 20 हजार जमा किए, इसके बाद किस्तें देना बंद कर दिया. लगातार
एक फोन कॉल से सामने आया फर्जीवाड़ा
14 अप्रैल 2026 दिनेश गुप्ता को एक परिचित का फोन आया कि उनके बेटे यश ने बैंक से लाखों का लोन लिया है. दिनेश को शक हुआ कि कहीं उनका घर गिरवी तो नहीं रख दिया गया. 18 मई 2026 को सच जानने के लिए दिनेश आगर स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पहुंचे. जब उन्होंने अपना परिचय देकर लोन की फाइल देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. बैंक के दस्तावेजों में दिनेश गुप्ता के नाम के आगे स्वर्गीय लिखा हुआ था. खुद पिता को सामने जिंदा खड़ा देख बैंक कर्मचारी भी सन्न रह गए. इसके बाद दिनेश ने अपने जिंदा होने के प्रूफ दिए और लोन फाइल की कॉपी ली.
नोटिस मिलने के बाद यश ने हाल ही में बैंक आकर एक आवेदन दिया.

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