भोपाल। मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित बशीर बद्र को गुरुवार शाम मग़रिब की नमाज़ के बाद भोपाल के बड़ा बाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में उनके परिजन, रिश्तेदार, साहित्यकार, शायर, सामाजिक हस्तियां और बड़ी संख्या में प्रशंसक शामिल हुए। पूरे माहौल में गम और खामोशी का आलम दिखाई दिया।
बशीर बद्र के अंतिम दर्शन के लिए दिनभर लोगों का उनके निवास पर आना-जाना लगा रहा। जनाजे में शामिल लोगों ने उन्हें आधुनिक उर्दू शायरी का बड़ा स्तंभ बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके बेटे तैयब बद्र ने अंतिम रस्मों को अंजाम दिया।
बशीर बद्र ने अपनी ग़ज़लों और शायरी के जरिए देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई थी। उनकी रचनाएं आम लोगों की भावनाओं और रिश्तों की नजाकत को बेहद सरल और असरदार अंदाज में पेश करती थीं। उनके निधन से साहित्य और उर्दू अदब की दुनिया में गहरा शून्य पैदा हो गया है।
