बैतूल: मध्यप्रदेश का सतपुड़ा अंचल अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा के लिए देशभर में पहचाना जाता है। इसी क्रम में बैतूल जिले में सांपों की विभिन्न प्रजातियों पर किए गए एक विस्तृत अध्ययन में जिले में सांपों की पांच फैमिली और 19 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें कई जहरीले और दुर्लभ सांप भी शामिल हैं, जो जंगलों के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी पाए गए हैं।
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के पूर्व प्राध्यापक डॉ. सुखदेव डोंगरे ने वर्ष 2024-25 के दौरान वन विभाग और स्नेक मित्रों के सहयोग से जिले का “स्नेक फौना” तैयार किया। इस शोध का उद्देश्य बैतूल जिले में पाई जाने वाली सर्प प्रजातियों का दस्तावेजीकरण करना और उनकी पारिस्थितिक भूमिका को समझना था।
डॉ. डोंगरे ने बताया कि सर्वे के दौरान बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी, आठनेर, भैंसदेही, शाहपुर, चिचोली, भीमपुर, पट्टन और मुलताई सहित जिले के दस विकासखंडों में अध्ययन किया गया। टीम ने वन क्षेत्रों, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, मेलघाट क्षेत्र और गांवों के आसपास सांपों की मौजूदगी का निरीक्षण किया। इस दौरान वन विभाग के रेंजर बरडे और स्नेक मित्र आदिल खान, विशाल विश्वकर्मा तथा जमाल भाई का सहयोग रहा।
अध्ययन में बोइडी फैमिली के रेड सेंड बोआ, कॉमन सेंड बोआ और भारतीय अजगर जैसी प्रजातियां दर्ज की गईं। वहीं कोलूब्रिडी फैमिली में सीता कील बैक, कॉमन कैट स्नेक, ब्रॉन्ज बैक ट्री स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, वुल्फ स्नेक, ग्रीन कील बैक, कॉमन कुकरी स्नेक, रसेल कुकरी स्नेक, रेट स्नेक और चेकरड कील बैक जैसी प्रजातियां सामने आईं।
जहरीले सांपों में इलापीडी फैमिली के कॉमन करैत और इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा की मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं वाइपरीडी फैमिली में सॉ स्केल्ड वाइपर, बम्बू पिट वाइपर और रसेल्स वाइपर पाए गए। इसके अलावा टाइफ्लोपिडी फैमिली के ब्राह्मणी वर्म स्नेक का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया।
डॉ. डोंगरे ने बताया कि यह अध्ययन सतपुड़ा क्षेत्र में पहले किए गए शोधों की कड़ी को आगे बढ़ाता है। इससे पहले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 39 प्रजातियों तथा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी क्षेत्र में 31 प्रजातियों का उल्लेख विभिन्न शोधों में किया जा चुका है। बैतूल जिले में मिली यह जानकारी भविष्य में वन्यजीव संरक्षण योजनाओं और जैव विविधता प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि समाज में सांपों को लेकर भय और भ्रांतियां आज भी बनी हुई हैं, जबकि सभी सांप जहरीले नहीं होते। अधिकांश प्रजातियां मानव जीवन और खेती के लिए लाभकारी हैं। धामन जैसे सांप बड़ी मात्रा में चूहों को खाकर फसलों की रक्षा करते हैं, जबकि कई अन्य प्रजातियां कीड़े-मकोड़ों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
डॉ. डोंगरे ने लोगों से अपील की कि सांप दिखाई देने पर उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक मित्रों को सूचना दें। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों की जागरूकता और सहभागिता से ही संभव हो सकता है।
