बैतूल: बैतूल कृषि उपज मंडी परिसर में व्यापारियों द्वारा बड़ी मात्रा में मक्का के बोरे डंप किए जाने से किसानों को खुले में उपज बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच किसान धूप में घंटों परेशान हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार मंडी में इस समय मक्का की आवक सीजन की तुलना में काफी कम है। दिसंबर से फरवरी के दौरान जहां प्रतिदिन लगभग 30 हजार क्विंटल मक्का मंडी पहुंचती थी, वहीं वर्तमान में आवक घटकर करीब आठ से नौ हजार बोरे प्रतिदिन रह गई है। इसके बावजूद मंडी के अधिकांश शेड व्यापारियों के मक्का बोरों से भरे पड़े हैं।
बताया गया है कि व्यापारी खरीदी के बाद समय पर बोरे नहीं उठा रहे हैं और मंडी परिसर में ही उनका भंडारण कर रहे हैं। मंडी के खुले हिस्सों में भी बड़ी मात्रा में मक्का डंप होने से किसानों को अपनी उपज रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।किसानों का आरोप है कि मंडी प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि प्रतिदिन खरीदी गई उपज को समय पर शेड से हटाया जाए, तो वर्तमान आवक को आसानी से शेड के भीतर रखा जा सकता है।
किसानों के अनुसार खरीफ सीजन के बाद हर वर्ष ऐसी स्थिति बनती है। व्यापारी हम्मालों और वाहनों की कमी का हवाला देकर मक्का को मंडी परिसर में जमा रखते हैं और बाद में रेल रैक लगने पर सीधे रैक पाइंट तक भेजते हैं।इस वर्ष मक्का के दाम कम रहने के कारण कई किसानों ने अपनी उपज रोककर रखी थी, जिसके चलते मई माह में भी मंडी में आवक बनी हुई है। किसानों ने मांग की है कि मंडी प्रबंधन प्रतिदिन सुबह तक सभी शेड खाली करवाए तथा व्यापारियों को निर्धारित समय सीमा में बोरे उठाने के लिए बाध्य किया जाए, ताकि किसानों को गर्मी में परेशान न होना पड़े।
