कंपाला/मबांजाकांगो, 23 मई (वार्ता) युगांडा में शनिवार को इबोला वायरस के तीन नये पुष्ट मामले सामने आये हैं जिनमें एक युगांडा का स्वास्थ्य कर्मी, एक वाहन चालक और पड़ोसी देश लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के इतूरी प्रांत से इलाज के लिए आया एक नागरिक शामिल है।
इन नये मामलों के साथ ही युगांडा में ‘बुंडिबुग्यो वायरस’ के कारण होने वाले इबोला रोग से संक्रमित मरीजों की कुल तादाद बढ़कर पांच हो गयी है।
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) की स्थिति तो बेहद खराब है। देश के पूर्वी हिस्से में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन वाले इबोला का प्रकोप तेजी से पैर पसार रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक इस बीमारी के 748 संदिग्ध मामले सामने आये हैं, जिनमें से 177 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। खतरे का आलम यह है कि यह संक्रमण अब सीमा पार कर युगांडा तक पहुंच चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए इसकी आधिकारिक जानकारी दी।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने इस संकट के समय मुस्तैदी से काम करने के लिए युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा, “संभावित और पुष्ट मरीजों की पहचान करने, उनकी निगरानी और इलाज के लिए युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयास सराहनीय हैं। संक्रमण के इस नाजुक दौर में वायरस के फैलाव को रोकने के लिए प्रशासन को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।”
इस महामारी की गंभीरता को देखते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने 19 मई 2026 को ही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (आईएचआर) आपातकालीन समिति की पहली बैठक बुलायी थी। इस बैठक के बाद सभी सदस्य देशों के लिए उनकी भौगोलिक स्थिति और जोखिम के आधार पर अस्थायी दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।
डब्ल्यूएचओ सचिवालय ने 22 मई 2026 को अपनी ताजा समीक्षा रिपोर्ट में इस महामारी के खतरे के स्तर को कांगो के लिए ‘बेहद उच्च’ और युगांडा के लिए ‘उच्च’ श्रेणी में रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समय ‘अफ्रीका सीडीसी’ और दोनों देशों के स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण को काबू करने तथा प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।
