इंदौर:देश में सबसे स्वस्छ शहर एक बार फिर चर्चित हनी ट्रैप मामले का केंद्र बन गया है. हनी ट्रैप-2 में गिरफ्तार श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित से पूछताछ में बड़े खुलासे हुए हैं. आरोपियों के पास से 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं और ब्लैकमेलिंग के जरिए करोड़ों की वसूली के संकेत सामने आए हैं.
क्राईम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक पूरा रैकेट सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था. भोपाल से श्वेता विजय जैन पूरे नेटवर्क को संचालित करती थी और खुद सामने आने के बजाय रेशू चौधरी के जरिए काम कराती थी.
रेशू अपने संपर्कों की जानकारी साझा करती थी, जिसके आधार पर टारगेट तय कर आगे की रणनीति बनाई जाती थी. जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली तक फैला हुआ था. मामले में एक विधायक, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कुछ नेता और एक पूर्व अधिकारी जांच के दायरे में हैं. वहीं छत्तीसगढ़ के एक डीआईजी रैंक अधिकारी, दिल्ली के एक वरिष्ठ नेता और गुजरात के एक उद्योगपति के नाम भी सामने आए हैं.
दिल्ली के एक नेता से करीब 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश की भी जांच की जा रही है. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं थे, बल्कि आपत्तिजनक वीडियो को बड़े स्तर पर बेचने की तैयारी कर रहे थे. जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव बनाने और आर्थिक सौदों के संकेत भी मिले हैं. एक विधायक से जुड़ा वीडियो दबाव बनाने के उद्देश्य से शेयर किए जाने की बात भी सामने आई है. वहीं देर रात हेड कान्सटेबल को सस्पेंड कर दिया है.
