
संजय बाजपेई धार। इंदौर हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद भोजशाला में पहली बार हिंदुओं द्वारा माता वाग्देवी की पूजा अर्चना और महाआरती की गई। अलसुबह से ही श्रद्धालु भोजशाला में विभिन्न अनुष्ठान करते देखे गए। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिनभर पूजन का क्रम चलता रहा। अलसुबह से ही भोजशाला में मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी। उधर, मुस्लिम समुदाय ने भी सौहार्द का परिचय दिया।
धार जिला मुख्यालय स्थित भोजशाला को माता वाग्देवी का मंदिर माने जाने के बाद यह पहला शुक्रवार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती प्रतीत होता रहा। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हिंदू पक्ष ने भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति रखकर पूजन और अन्य अनुष्ठान किए। सुबह से ही भोजशाला में घंटे घड़ियाल बजाते हुए जयकारे लगाते श्रद्धालु देखे गए।संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क रहे। नगर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। अधिकारियों द्वारा दोनों समुदायों से लगातार शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की जाती रही। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार स्थिति पर नजर रखी जाती रही। भोजशाला में पूजन कर श्रद्धालु अति उत्साह में नजर आए। पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से चलती रहीं।
पेट्रोलिंग वाहन लगातार करते रहे गश्त
शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहरभर में भारी पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहा। पेट्रोलिंग वाहन लगातार सड़कों पर गश्त लगाते हुए देखे गए। इसी भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुस्लिम समाज ने भी संयम और सौहार्द का परिचय देते हुए विरोध स्वरूप अपने घरों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। मुस्लिम समाज के सदर व शहरकाजी ने कहा कि वे हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं, किंतु निर्णय से पूर्णतः संतुष्ट नहीं हैं। इसी कारण न्याय की उम्मीद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रशासन की अपील का असर भी देखने को मिला। दोनों समुदायों ने संयम का परिचय देते हुए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखा। कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। नगर में आपसी भाईचारा कायम रहा। वहीं हाई कोर्ट के आदेश को मुस्लिम समाज द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
