हनी ट्रैप सिंडिकेट में एक-एक कर पकड़ में आ रहीं कड़ियां, सागर से पकड़ी नेटवर्क ऑपरेटर महिला

इंदौर. पिछले दिनों शहर में सामने आए हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है. सागर से एक और महिला की गिरफ्तारी के साथ अब तक इस मामले में आधा दर्जन से ज्यादा आरोपी पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से नेताओं, कारोबारियों और अफसरों को फंसाकर ब्लैकमेलिंग का बड़ा नेटवर्क चला रहा था.

क्राइम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक सागर से पकड़ी गई महिला रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी इस नेटवर्क की अहम कड़ी है. वह पूर्व में भाजपा के एक प्रकोष्ठ से भी जुड़ी रही है और अन्य महिला आरोपियों के साथ मिलकर टारगेट तय करने और जाल बिछाने में सक्रिय भूमिका निभाती थी. जबकि इससे पहले पुलिस मामले की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा , जितेंद्र पुरोहित को हिरासत में ले चुकी है. इस तरह अब तक 7 से अधिक आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं.

वहीं पूछताछ में सामने आया है कि श्वेता विजय जैन के जरिए रेशू और अलका के बीच संपर्क हुआ था, जिसके बाद तीनों ने मिलकर पूरा गिरोह खड़ा किया था. रेशू ने अलका को कई प्रभावशाली लोगों के संपर्क होने की जानकारी दी थी, जिनमें नेता, प्रॉपर्टी कारोबारी, फाइनेंसर और अफसर शामिल थे. इन्हें निशाना बनाकर आसानी से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई गई. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी टारगेट किया था. वहीं, एक कारोबारी को ब्लैकमेल करते समय आरोपियों ने बड़े लोगों के आपत्तिजनक वीडियो होने का हवाला देकर दबाव बनाया. पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ ऑडियो वीडियो फाइलें भी मिली हैं, जिन्हें अहम सबूत माना जा रहा है. इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और पीड़ितों की पहचान की जा रही है. क्राईम ब्रांच के सूत्रों का कहना हैं कि श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की दोस्ती जेल में हुई थी. बाद में रेशू को इस नेटवर्क में जोड़ा और तीनों ने मिलकर पूरे ब्लैकमेलिंग रैकेट की रूप रेखा तैयार की. चिंटू ठाकुर से जुड़े इस मामले में यह भी सामने आया है कि शिकायत के करीब 19 दिन बाद एफआईआर दर्ज की. चिंटू ठाकुर पहले से ही आजाद नगर थाने में हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी है.

अन्य की तलाश जारी : डीसीपी

पूरे मामले में डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश त्रिपाठी ने बताया कि गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है.

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