पटेरा/दमोह: रनेह थाना क्षेत्र के ग्राम महेवा में 17 वर्षीय रिंकी बर्मन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.परिजनों के मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब 12 बजे गंगा बर्मन अपनी बेटी रिंकी को इलाज के लिए पटेरा स्थित कथित डॉक्टर लीलाधर अहिरवार के पास लेकर पहुंचे. आरोप है कि इलाज के नाम पर एक ही बॉटल में 7-8 इंजेक्शन मिलाकर नाबालिग बच्ची को चढ़ा दिए गए.
हालत बिगड़ने पर जब बच्ची ने प्यास लगने की बात कही, तो उसे एक और इंजेक्शन लगाया गया और कहा गया, अब पानी नहीं मांगेगी. इसके बाद डॉक्टर ने बच्ची को घर भेज दिया.घर पहुंचते ही बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई, शरीर ठंडा पड़ने लगा.घबराए परिजन तुरंत पटेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.
शाम को शव सुरक्षित रखवाया गया और अगले दिन पोस्टमार्टम की बात कही गई, लेकिन सुबह तक परिजनों की सुनवाई नहीं हुई.आक्रोशित होकर परिजनों ने मंगलवार करीब 11 बजे पटेरा-हटा मार्ग पर मुक्तिधाम के पास चक्काजाम कर दिया.सूचना मिलते ही रनेह थाना पुलिस मौके पर पहुंची.समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद जाम खुलवाया गया. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर गांव में आक्रोश है.
