
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 18 मई को E22, E25, E27 और E30 फ्यूल ब्लेंड के लिए नए मानक जारी किए हैं। इसका मतलब है कि अब पेट्रोल में क्रमशः 22, 25, 27 और 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जा सकेगा। बीआईएस की अधिसूचना के अनुसार ये मानक ऐसे ईंधन मिश्रणों के लिए लागू होंगे, जिनमें मोटर गैसोलीन के साथ नमी रहित एथेनॉल मिलाया जाएगा। यह ईंधन मुख्य रूप से पेट्रोल इंजन वाले वाहनों में उपयोग के लिए तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और लंबे समय में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इस फैसले के बाद वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल कंपनियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। देश में करोड़ों दोपहिया और कारें अभी भी ऐसे इंजन पर आधारित हैं, जिन्हें कम एथेनॉल मिश्रण के हिसाब से डिजाइन किया गया था। ऐसे में E20 से अधिक मिश्रण वाले ईंधन का इंजन की क्षमता, माइलेज और लंबे समय तक वाहन की कार्यक्षमता पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर बहस तेज हो गई है। वाहन चालकों का कहना है कि ज्यादा एथेनॉल मिश्रण से माइलेज कम होने और इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। सोशल मीडिया पर कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सामान्य पेट्रोल से सस्ता होगा। हाल में पेट्रोल कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बीच कुछ उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करने को भी बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
